नक्सलियों का खौफ कम, पर जिंदगी अब भी चुनौतीपूर्ण

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा घने जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियां, संकरी पगडंडियां और बीच-बीच में बहते नाले बैलाडीला की इन्हीं दुर्गम वादियों के बीच जब एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी, तब उम्मीद की किरण बनकर पहुंचे सीआरपीएफ के जवान। जवानों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए महिला को चारपाई पर कंधों में बांध कांवड़ की तरह ढोया और कई किलोमीटर पैदल चलकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने से अब जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। मामला बीजापुर जिले के टिमनार क्षेत्र के कुंजाम पारा का है। गांव तक सड़क नहीं है, वाहन पहुंचना नामुमकिन हैं। अचानक महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। हर पल की देरी मां और गर्भस्थ शिशु के लिए खतरा बन सकती थी। परिजन असहाय थे, बेबसी साफ झलक रही थी। ऐसे में सूचना मिलते ही 165वीं बटालियन के अधिकारी राजेश गुर्जर (ओसी, सी कंपनी) ने बिना देर किए जवानों की टीम के साथ गांव की ओर रुख किया। रास्ता इतना कठिन था कि हर कदम संभलकर रखना पड़ रहा था। पहाड़ी ढलानों पर फिसलन, बीच-बीच में नाले और घना सन्नाटा। बावजूद इसके जवानों के हौसले बुलंद रहे। महिला को सावधानी से चारपाई पर लिटाया गया। चारों ओर सन्नाटा और बीच-बीच में दर्द से कराहती महिला की आवाज। जवान लगातार उसे ढाढ़स बंधाते रहे। कई किलोमीटर तक कंधों पर चारपाई उठाकर जवान पसीने से तरबतर होते रहे, लेकिन कदम नहीं रुके। रोड तक पहुंचते ही जी कंपनी के ओसी से समन्वय कर तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। टिमनार कैंप तक एंबुलेंस पहुंची, जहां से महिला को मिरतुर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से महिला और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के अंदरूनी क्षेत्रों में स्थापित सीआरपीएफ कैंप अब दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। एक ओर जहां जवान नक्सल गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कैंपों में मौजूद मेडिकल टीम ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। दुर्गम अंचलों में यही कैंप कई बार ग्रामीणों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रहे हैं। बैलाडीला की पहाड़ियों के पीछे बसे लोहा गांव, पुरेंगेल और बीजापुर जिले के दर्जनों गांवों में आज भी स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना किसी जंग लड़ने से कम नहीं। इन इलाकों में सड़क-पुलिया का अभाव है। जिस रास्ते से जवान महिला को लेकर आए, वह इलाका कभी प्रेशर आईईडी के खतरे के लिए जाना जाता रहा है। बावजूद इसके महिला को तड़पता देख जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे सुरक्षित कैंप तक पहुंचाया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *