बालाघाट जिले में नक्सलियों के खात्मे और जंगलों में बढ़ती माइनिंग की गतिविधियों को लेकर अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस विधायक संजय उईके ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों पj सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार क्षेत्र से नक्सलियों के सफाए का दावा करती है और दूसरी तरफ उन्हीं वन क्षेत्रों में माइनिंग का काम शुरू कर दिया जाता है। विधायक बोले- वन हमारे लिए देवता, विनाश मंजूर नहीं सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विधायक उईके ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन देवता के समान हैं। उन्होंने लौंगुर से पचामादादर के बीच के वन क्षेत्र में बॉक्साइट खनन की अनुमति दिए जाने को नियम विरुद्ध बताया। विधायक का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में ‘फॉरेस्ट रिजर्व एक्ट’ और पेसा कानून की अनदेखी की गई है। सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल विधायक उईके ने माइनिंग के लिए तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट को भ्रामक और गलत बताया। उन्होंने कहा कि विभाग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में वन्यप्राणियों का कोई गलियारा (कॉरिडोर) या आदिवासियों का निवास नहीं है, जबकि हकीकत इसके उलट है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह क्षेत्र कान्हा और पेंच नेशनल पार्क के बीच वन्यप्राणियों के आवागमन का मुख्य रास्ता है। साथ ही, यहाँ की 14 पंचायतों के 46 गांवों में लगभग 33 हजार लोग रहते हैं। विधानसभा में सवाल रोकने का आरोप विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उनके सवालों को लगने नहीं दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सड़क से लेकर कोर्ट तक ले जाया जाएगा। जनसुनवाई रोकने की चेतावनी इसी मामले में जिला पंचायत सदस्य मंशाराम मड़ावी ने प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि खनन की अनुमति के लिए 18 फरवरी को होने वाली जनसुनवाई को तुरंत टाला जाए। यदि सरकार और प्रशासन ने जनसुनवाई नहीं रोकी, तो तहसील मुख्यालय पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।


