नक्सली नेता ने माना- नक्सलवाद का अस्तित्व खतरे में, नई भर्तियां नहीं

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा बस्तर में नक्सलियों ने संगठन में लड़ाकों की भर्ती के लिए नया तंत्र विकसित कर लिया है। पहले युवाओं को टारगेट कर नक्सली उनका ब्रेनवॉश करते हुए उन्हें संगठन में शामिल करते थे, लेकिन अब बच्चों को उन्होंने टारगेट करना शुरू कर दिया है। नक्सली अब 9 साल के बच्चों के हाथों में हथियार थमा रहे हैं। इस उम्र के बच्चों को टारगेट कर उन्हें हथियार थमाने के साथ ही जंगल में ही उन्हें बम बनाना भी सिखा रहे हैं। मंगलवार को मुठभेड़ में मारे गए एसजेडसी सुधाकर उर्फ सुधीर के पत्र से इस बात का खुलासा हुआ है। तेलुगू भाषा में लिखे गए 4 पन्नों के पत्र में 9 से 11 साल के 40 बच्चे, 14 से 17 साल के 40 बच्चे और 18 से 22 साल के 50 युवा, कुल 130 बच्चों-युवाओं को नक्सल संगठन में नई भर्ती के तहत शामिल किया गया है। मृत नक्सली नेता के पत्र के मुताबिक जंगल में इन बच्चों को नक्सली गुरिल्ला युद्ध तकनीक का प्रशिक्षण देने के साथ ही हथियार चलाने, स्नाइपर बनाने और आईईडी बनाने का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। मृत नक्सली नेता के पत्र में उल्लेख किया गया है कि नक्सल संगठन में नई भर्ती नहीं की जा रही है, जिससे संगठन कमजोर हो रहा है। युवाओं को संगठन में शामिल करना बेहद मुश्किलभरा हो गया है। कुछ महीने पहले माड़ इलाके में हुई ग्रामसभा में आखिरी भर्ती हुई थी। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि नक्सलियों को यदि उनके परिवार के लोगों से मिलने की इच्छा है तो उन्हें जंगल में ही बुलवाया जाए, न कि नक्सली उनसे मिलने गांव जाएं। ठिकाने पर ही अपने परिवार के सदस्यों से मिलकर उन्हें वापस भेज दिया जाए। यदि कोई गांव जाता भी है तो इसकी जानकारी संगठन के बड़े लीडर्स को अनिवार्य रूप से दिया जाए। बिना अनुमति जंगल में बने ठिकाने को छोड़कर जाने पर नक्सलियों ने प्रतिबंध लगा रखा है। तेलुगू भाषा में लिखे गए 4 पन्नों के पत्र में इस बात का जिक्र है कि माड़ डिवीजन के इंद्रावती एरिया कमेटी और नेलनार एरिया में 130 लोगों की नई भर्ती हुई है। 18 से 22 वर्ष की उम्र के युवाओं को हथियार दिए गए हैं, जबकि 9 से 17 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को पढ़ाकर उन्हें अक्षर ज्ञान दिया जा रहा है। मारे गए नक्सलियों के पास से गिनती, ककहरा लिखी कॉपियां मिली हैं, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। पत्र में मृत नक्सली लीडर ने लिखा है कि जिन लोगों की भर्ती संगठन में की गई थी, वे अब लड़ने के लायक नहीं रह गए हैं। संगठन में लड़ाके चाहिए। जो भर्ती हुए हैं, उन्हें नक्सल नीति, राजनीति व गुरिल्ला युद्ध नीति का प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन उन्हें लड़ने लायक बनाने में समय लगेगा। संगठन से जुड़े अधिकांश लोगों ने या तो आत्मसमर्पण कर दिया है या मारे जा चुके हैं। संगठन में नई भर्तियां नहीं होने की स्थिति में नक्सलवाद का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। पत्र को अलग-अलग एरिया कमेटियों को भेजकर नई भर्ती और मीटिंग में हुई समीक्षा की जानकारी दी गई है। भर्ती होने वाले युवाओं के गांव जाने पर प्रतिबंध: नक्सल संगठन में शामिल होने वाले युवाओं को वापस गांव जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। क्योंकि गांव जाने पर जवानों के संपर्क में आने से मन बदल सकता है। नई भर्ती में जिन लड़ाकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उन्हें एयर स्ट्राइक, जंगल की भौगोलिक स्थिति और गुरिल्ला युद्ध तकनीक के गुर सिखाए जा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा बाहर से गेस्ट लेक्चरर को भी बुलवाया गया था।

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