प्रदेश के सभी नगर निगमों की सड़कों में फ्लाई ओवर, अंडरपास, सर्विस लेन के साथ ही रोटरी और चौक का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा निकायों में स्पोर्टस कॉम्पलेक्स और हाईटेक बस स्टैंड बनाए जाएंगे। राज्य शासन ने प्रदेश के शहरों को रहने लायक बनाने और लोगों को उच्चस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए नगरोत्थान योजना शुरू की है। इस योजना की पूरी गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसके माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्टर को मजबूत बनाया जाएगा और पीने का साफ पानी, स्वच्छता, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइटिंग और हरियाली बढ़ाने जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना पर लगभग पांच सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे। बताया गया है कि पहले चरण में यह सभी नगर निगमों में लागू होगा जबकि बाद के चरणों में इसे नगर पालिकाओं में भी लागू किया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि शहरों में यातायात की बढ़ती समस्याओं, अव्यवस्थित परिवहन और शहरीकरण के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के संचालन के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है। योजना के तहत ये प्रमुख काम होंगे
मुख्य सड़क निर्माण या इसका चौड़ीकरण, बायपास रोड का निर्माण, मुख्य सड़कों पर सर्विस रोड, फ्लाई ओवर का निर्माण, अंडरपास का निर्माण, जलप्रदाय योजना के काम, सीवरेज नेटवर्क निर्माण, एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, मुख्य सड़कों पर रोटरी, चौक का निर्माण, स्पोर्टस कॉम्पलेक्स का निर्माण, हाईटेक बस स्टैंड का निर्माण, ऑडिटोरियम, भव्य उद्यान निर्माण या रिवर फ्रंट का डवलपमेंट कार्य और पर्यटन स्थलों के विकास के अलावा अन्य योजनाओं को भी शामिल किया जा सकता है। सड़कों के चौड़ीकरण से दबाव होगा कम
सड़कों के निर्माण व चौड़ीकरण, फ्लाईओवर, रोटरी और चौक के निर्माण से शहर की सुंदरता तो बढ़ेगी, साथ ही सड़कों पर दवाब भी कम होगा। बड़े, छोटे और सार्वजनिक वाहनों को सुगम यातायात मिल सकेगा। सर्विस लेन से प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दवाब कम होगा। इस योजना के लिए निकायों को अलग बैंक खाते खोलने होंगे। विभाग द्वारा जारी राशि का 70 फीसदी खर्च होने पर उपयोगिता प्रमाण पत्र देना होगा। कलेक्टर करेंगे मॉनिटरिंग
योजना की मॉनिटरिंग का जिम्मा जिला कलेक्टरों के पास होगा। कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। समिति योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए कामों की प्रगति की समीक्षा करेगी, साथ ही समय सीमा में सभी निर्माण कराए जाएंगे। समिति में कलेक्टर के अलावा, पीडब्ल्यूडी के ईई व पीएचई के ईई सदस्य होंगे, जबकि निगम आयुक्त सदस्य सह सचिव होंगे।
पालिका में भी होगी लागू
नगरोत्थान योजना पहले चरण में प्रदेश के सभी नगर निगमों में लागू किया जाएगा। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से सभी नगर पालिकाओं में लागू किया जाएगा। निकायों द्वारा काम का डीपीआर नगरीय प्रशासन संचालनालय को भेजा जाएगा। विभाग द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद बजट की स्वीकृति प्रशासकीय और वित्त विभाग से ली जाएगी।


