भास्कर न्यूज | मनेंद्रगढ़ नजूल मद की भूमि को कृषि भूमि बताकर कई टुकड़ों में अवैध प्लॉटिंग कर शासन के साथ धोखाधड़ी करने और सार्वजनिक तालाब की भूमि को शासकीय घोषित कराने की मांग को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की गई है। मनेंद्रगढ़ निवासी शिकायतकर्ता पुखराज ने कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार मनेंद्रगढ़ स्थित भूमि खसरा नंबर 165 रकबा 2.85 एकड़ और खसरा नंबर 167 रकबा 55 डिसमिल वर्ष 1944-45 के मिसल अभिलेख में रंगलाल व रामगोपाल वल्द मोहनलाल अग्रवाल के नाम पर दर्ज थी। नगर पालिका व बाजार क्षेत्र में आने के कारण उक्त भूमि बाद में नजूल घोषित हो गई। वर्तमान नजूल अभिलेख में भू-खंड क्रमांक 165 रकबा 1,24,140 वर्गफुट और भू-खंड क्रमांक 167 रकबा 45,980 वर्गफुट भूमि राधेश्याम गोयल और रामकुमार गोयल के नाम दर्ज है। आरोप है कि उक्त दोनों खसरा नंबर ऑनलाइन नक्शा, खसरा व बी-1 में कृषि मद में भी दर्ज होने का फायदा उठाकर पवन गोयल और उनके परिवार द्वारा मूल नजूल भूमि को छिपाकर कृषि भूमि बताकर कई हिस्सों में अवैध प्लॉटिंग कर बिक्री की गई है। बताया गया कि मूल नजूल भू-खंड क्रमांक 165 के अंतर्गत कृषि मद में अब तक 19 बटांकन किए जा चुके हैं, जबकि नजूल घोषित होने के बाद इस भूमि का कृषि स्वरूप समाप्त हो चुका था। शिकायतकर्ता ने जांच कर सभी बटा नंबरों को पुनः नजूल मद में दर्ज किए जाने की मांग की है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि खसरा नंबर 165 में लगभग 60 से 70 डिसमिल भूमि पर पुराना सार्वजनिक तालाब निर्मित है, जो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 251 के तहत राज्य सरकार की संपत्ति है। आरोप है कि पवन गोयल एवं उनके परिजन तालाब को धीरे-धीरे पाटकर वहां अवैध प्लॉटिंग की तैयारी कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने तालाब के वास्तविक रकबे की जांच कर उसे शासकीय संपत्ति घोषित किए जाने की मांग की है।


