छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत पढ़ने वाले छात्रों की अपार आईडी (APAAR ID) को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए एक नए आदेश का विरोध शुरू हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने कहा है कि RTE के तहत पढ़ रहे बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति (जो सरकार स्कूलों को देती है) तभी मिलेगी, जब हर बच्चे की अपार आईडी बनी हो और पोर्टल पर उसका मिलान हो जाए। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि यह आदेश व्यवहारिक नहीं है और RTE की मूल भावना के विपरीत है। प्राइवेट स्कूलों के मुताबिक प्रदेश में अब तक अपार आईडी शत-प्रतिशत नहीं बन पाई है। ऐसे में प्रतिपूर्ति राशि को पूरी तरह अपार आईडी से जोड़ना त्रुटिपूर्ण है। स्कूलों का तर्क है कि अपार आईडी बनवाना केवल विद्यालय के कार्यक्षेत्र में नहीं आता, बल्कि इसमें अभिभावकों की सहमति और सहयोग सबसे अहम है। नए आदेश पर प्राइवेट स्कूलों ने गिनाई तीन बड़ी समस्या एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि जो बच्चे पहले से RTE पोर्टल में पंजीकृत हैं और स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें इस नए नियम से बाहर रखा जाए। यानी उनके लिए प्रतिपूर्ति न रोकी जाए। उनका सुझाव साफ है
इसके अलावा नया नियम सत्र 2026-27 से लागू किया जाए। वहीं अगर कोई नया बच्चा बिना अपार आईडी के आता है, तो उसे प्रवेश के समय ही रोक दिया जाए, न कि पुराने बच्चों की फीस रोककर स्कूलों पर दबाव डाला जाए।


