नरसिंहपुर रेलवे अस्पताल में मंगलवार को राष्ट्रीय कृमि नाशक दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि मुक्त बनाने के उद्देश्य से एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक-मानसिक विकास में सुधार लाना है। यह अभियान ‘कृमि मुक्त भारत’ के लक्ष्य के साथ संचालित किया जा रहा है। जानकारी दी गई कि आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों और सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चों को एल्बेंडाजोल दवा की निःशुल्क खुराक साल में दो बार उपलब्ध कराई जाती है। अभियान की मुख्य थीम कृमि मुक्त भारत और बाल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। रेलवे चिकित्सक डॉ. आर.आर. कुर्रे ने बताया कि जिन बच्चों को 10 फरवरी को दवा नहीं मिल पाई, उन्हें 13 फरवरी और उसके बाद खुराक दी जाएगी। उन्होंने कृमि संक्रमण के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेट में कृमि होने से बच्चों में खून की कमी, कमजोरी, कुपोषण, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में मन न लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में कृमि संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में भूख कम लगना, पेट दर्द, दस्त, थकान, कमजोरी और खून की कमी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में एकाग्रता की कमी भी कृमि संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। डॉ. कुर्रे ने स्कूल शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को हर छह माह में कृमि नाशक दवा अवश्य दिलाएं। उनका कहना था कि यह बच्चों के समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक है, जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और राष्ट्रीय कृमि मुक्त भारत का लक्ष्य पूरा किया जा सके।


