देवली उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान SDM के थप्पड़ मारने के मामले में हाईकोर्ट से BSS सुप्रीमो नरेश मीना को मिली जमानत को कैंसिल कराने के मामले में आज SC,ST कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अब इसका फैसला 7 मार्च को आएगा। इस मामले को लेकर नरेश मीणा के वकील फतेहराम मीणा का कहना है कि राजनीतिक रंजिश को लेकर हाईकोर्ट से मिली जमानत को खारिज कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि नरेश मीणा ने हाईकोर्ट से मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। शर्तों का उल्लंघन करता तो हाईकोर्ट ही संज्ञान ले लेता, लेकिन कुछ लोग उससे रंजिश रखते है। जो दिन भर जमानत कैंसिल कराने के लिए लगे हुए हैं। नरेश मीणा के खिलाफ जो भी मामले है वे जनहित में किए हुए संघर्ष के हैं। जमानत के बाद किसी भी मामले में चालान पेश नहीं हुआ, फिर भी उसकी जमानत खारिज कराने पर तुले हुए हैं। उपचुनाव के दिन एसडीएम काे मारा था थप्पड़ दरअसल, देवली-उनियारा विधानसभा के समरावता (टोंक) गांव में उपचुनाव में वोटिंग का बहिष्कार किया गया था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ग्रामीणों के साथ धरने पर थे। इसी दौरान नरेश मीणा ने अधिकारियों पर जबरन मतदान करवाने का आरोप लगाया था। नरेश मीणा पोलिंग बूथ पर आए और उन्होंने SDM अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। नरेश मीणा वापस जाकर धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की गाड़ी रोकने को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में ले लिया था। मीणा के समर्थकों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे और भड़क गए थे। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी और पुलिस के जवान आमने-सामने हो गए थे और नरेश मीणा को छुड़ाकर ले गए था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। ग्रामीणों पर भी पथराव का आरोप लगाया था। घटना से पूरे गांव में आगजनी हो गई थी। पुलिस ने 61 लोगों को किया था गिरफ्तार समरावता हिंसा मामले में पुलिस ने करीब 61 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें से 18 लोगों को टोंक जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई। वहीं, 40 लोगों को 3 जनवरी को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके अलावा तीन नाबालिग भी पुलिस ने पकड़े थे, उन्हें भी टोंक के जिला जज ने जमानत दे दी थी।


