रेल संचालन की सुरक्षा को और अधिक बढ़ाकर हाईटेक बनाने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने एक बड़ी पहल की है। रेल मंडल द्वारा नॉन-इंटरलॉक्ड समपार फाटकों पर अत्याधुनिक सीसीटीवी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित की गई है। यह नवाचार उत्तर पश्चिम रेलवे जोन में पहली बार जोधपुर मंडल में लागू किया गया है, जो रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने सोमवार इस सिस्टम का औपचारिक निरीक्षण करने के बाद बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और ट्रेन संचालन को पूरी तरह सुरक्षित बनाना रेलवे की पहली प्राथमिकता है। इन सेक्शन्स के फाटकों को किया गया डिजिटल रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के कड़े मानकों और स्पेसिफिकेशन के अनुरूप इस सिस्टम को डवलप किया है। शुरुआत में उन फाटकों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका टीयूवी (ट्रेन-व्हीकल यूनिट) 10 हजार से कम है, इनमें: तिंवरी-ओसियां सेक्शन: यहां स्थित एलसी गेट संख्या-37 को पूरी तरह कैमरों की निगरानी में ले लिया गया है। जाजीवाल-आसारानाडा सेक्शन: इस सेक्शन के एलसी गेट संख्या-152 पर भी सीसीटीवी सिस्टम स्थापित किया जा चुका है। स्टेशन मास्टर के पास होगी लाइव फीड इन चयनित समपार फाटक पर चार फिक्स्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों को इस तरह लगाया गया है कि गेट क्षेत्र के हर हिस्से की प्रभावी निगरानी संभव हो सके। रियल टाइम मॉनिटरिंग: इन कैमरों की लाइव फीड सीधे उस स्टेशन पर पहुंच रही है, जहां से संबंधित गेट का संचालन किया जाता है। लेटेस्ट उपकरण: संबंधित स्टेशनों पर सीपीयू युक्त 24 इंच का बड़ा मॉनिटर और हाई-स्पीड नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है। सुरक्षा का दोहरा घेरा: अब ट्रेन संचालन के समय स्टेशन मास्टर अपनी स्क्रीन पर यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि समपार फाटक वास्तव में बंद हो गया है और ट्रैक पूरी तरह साफ है। इंजीनियरिंग कंट्रोल से होगी सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (सिग्नल एंड कम्यूनिकेशन) अनुपम कुमार के अनुसार, रेलवे बोर्ड के निर्देशों की पालना में इस प्रणाली को मंडल स्तर पर भी जोड़ा गया है। जोधपुर स्थित इंजीनियरिंग कंट्रोल ऑफिस में एक सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इससे न केवल स्टेशन मास्टर, बल्कि मंडल के उच्चाधिकारी भी इंजीनियरिंग कंट्रोल से फाटकों की गतिविधियों और गेटमैन की कार्यप्रणाली पर सतत नजर रख सकेंगे। डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कंट्रोल रूम से इन फाटकों की लाइव स्थिति देख कर इस प्रणाली की कार्यक्षमता को जांचा।


