नागौर में कॉम्प्लेक्स में चल रहा था सट्टा कारोबार, 2-गिरफ्तार:लेन-देन के हिसाब के 21 रजिस्टर मिले; ऑनलाइन ऐप से करते थे डील

नागौर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के बड़े कारोबार का खुलासा किया है। पुलिस ने ताउसर रोड स्थित एक कॉम्प्लेक्स में दबिश देकर दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास 21 रजिस्टर बरामद किए गए है, जिनमें करोड़ों रुपए के लेन-देन का हिसाब- किताब मिला है। कार्रवाई नागौर जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के निर्देशन में कोतवाली थाना पुलिस और जिला विशेष टीम (DST) की संयुक्त टीम ने की। ​भींवराज कॉम्प्लेक्स में दी दबिश ​कार्रवाई उप निरीक्षक अमरचन्द और उनकी टीम ने गश्त के दौरान मिली एक सूचना के आधार पर की। ताउसर रोड स्थित भींवराज कॉम्प्लेक्स की पहली मंजिल पर एक फ्लैट में ऑनलाइन क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर घेराबंदी की और वहां से अशोक भाटी निवासी रोल और हिम्मताराम गहलोत निवासी चेनार को दस्तयाब किया। ​करोड़ों का मिला हिसाब ​मौके पर तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से सट्टे के हिसाब-किताब के 21 छोटे-बड़े रजिस्टर, 2 डायरियां, बिल बुक और चेक बुक मिलीं। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल में ‘Trump 24’ ऐप पर पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच चल रहे क्रिकेट मैच पर ऑनलाइन सट्टा खेलना पाया गया। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करते हैं और हिसाब रखने के लिए रजिस्टरों के साथ-साथ कंप्यूटर व लैपटॉप का भी उपयोग करते हैं। पुलिस ने मौके से एक कंप्यूटर सेट, एप्पल कंपनी का लैपटॉप, जियो वाईफाई सेटअप बॉक्स, 4 मोबाइल और 3 एटीएम कार्ड सहित सट्टा उपकरण जब्त किए हैं। ​पुलिस टीम की मुस्तैदी से मिली सफलता ​एसपी मृदुल कच्छावा के सुपरविजन में हुई इस कार्रवाई को अंजाम देने में कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवराण, उप निरीक्षक अमरचन्द और डीएसटी प्रभारी मुकेशचन्द्र की मुख्य भूमिका रही। पुलिस अब आरोपियों से सट्टे के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रही है। पुलिस बोली- गिरोह होने की आशंका, जांच कर रहे हैं जांच अधिकारी IPS अदिति उपाध्याय ने बताया कि पूछताछ और अब तक की जांच से यह खुलासा हुआ है कि यह गिरोह एक ऑनलाइन वेबसाइट और मल्टी-लेवल स्कीम के जरिए काम करता था। गिरोह के सदस्य ग्राहकों को सुरक्षित सर्वर के लिए आईडी और पासवर्ड प्रदान करते थे और सारा लेनदेन ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाता था। ​अदिति उपाध्याय ने यह भी बताया कि यह एक काफी बड़ा गिरोह हो सकता है और इसके वित्तीय और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पिछले सात वर्षों के लेनदेन और कुल धनराशि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और रजिस्टर में दर्ज जानकारी काफी कच्ची (rough) है, इसलिए पुख्ता तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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