नागौर में जिला अधिवक्ता संघ ने जिला मुख्यालय पर जिला एवं सत्र न्यायालय सहित विभिन्न विशिष्ट अदालतों की स्थापना की मांग की है। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष डॉ. पवन श्रीमाली और महासचिव क्षेमेन्द्र कुमार बेड़ा के नेतृत्व में सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में वकीलों ने कहा कि वर्तमान में जिला न्यायालय मेड़ता सिटी में स्थित है, जो भौगोलिक रूप से जिले के एक कोने पर है और वहां तक पहुंचने के लिए अधिकांश उपखंडों से सीधे सड़क या रेल मार्ग की सुविधा भी नहीं है। जबकि नागौर शहर जिले के केंद्र में स्थित है और सभी सरकारी व अर्द्ध-सरकारी विभागों का मुख्यालय भी यहीं है। मेड़ता में जिला स्तरीय कार्यालयों के अभाव और मुकदमों की कम संख्या के बावजूद मुख्यालय वहां होने से आम जनता को भारी आर्थिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। वकीलों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार भी जिला न्यायालय का मुख्यालय जिला मुख्यालय पर ही होना चाहिए। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष के बीच राज्य सरकार ने 23 जून 2021 को न्यायालय भवन के लिए 30.06 बीघा जमीन तो आवंटित कर दी है, लेकिन अभी तक वहां चारदीवारी का निर्माण नहीं हुआ है। सुरक्षा दीवार न होने के कारण आवंटित भूमि पर बार-बार अतिक्रमण के प्रयास हो रहे हैं। इसके साथ ही नागौर में मुकदमों के बढ़ते बोझ को देखते हुए अपर जिला न्यायाधीश संख्या-तीन, पारिवारिक न्यायालय, एनडीपीएस कोर्ट, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, और एससी-एसटी कोर्ट जैसे विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग की गई है, जिससे पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिल सके। वकीलों ने कहा कि पूर्व में भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपना धरना समाप्त किया था, लेकिन कुछ सालों से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। अब संघ ने मांग की है कि किराए के मामलों की अपीलीय सुनवाई भी नागौर में ही हो, क्योंकि वर्तमान में इसके लिए पक्षकारों को 80 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ज्ञापन सौंपने के दौरान नवीन न्यायालय स्थापना संघर्ष समिति के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे।


