नाफरमानी:148 स्कूलों को नोटिस, 18303 विद्यार्थियों की अपार आईडी बनानी थी, सिर्फ 2 बनाई

जिले के सरकारी और प्राइवेट स्कूल विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने के काम में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि सागर जिला प्रदेश के बॉटम-20 में बना हुआ है। विद्यार्थियों के हितों की दुहाई देने वाले प्राचार्य, शिक्षक और निजी स्कूल संचालक विद्यार्थियों के भविष्य के लिए मददगार अपार आईडी बनाने के काम में सबसे ज्यादा लापरवाह हैं। स्थिति यह है कि जिले के 147 निजी एवं सरकारी हाई और हायर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी अपार आईडी नहीं बनाई गई है। एक स्कूल में मात्र 2 विद्यार्थियों की आईडी बनाई गई है। डीईओ अरविंद जैन ने इन 148 स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को नोटिस जारी किया है। इन्होंने 18303 विद्यार्थियों में से मात्र 2 की ही अपार आईडी बनाई हैं। सभी को कहा गया है कि 3 तीन में शतप्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी बनाएं। ऐसा न करने पर प्राचार्यों का वेतन रोकने एवं निजी स्कूलों की मान्यता समाप्ति की कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। नर्सरी से 8वीं तक 5% काम, 9 से 12वीं तक 20.4% ही बन सकीं सागर जिले के 4 लाख 97 हजार 836 विद्यार्थियों की आईडी बनना है। जिनमें से मात्र 45 हजार 138 की ही बनाई जा सकी हैं। जिले में मात्र 9.1% काम ही हुआ है। इसमें भी सबसे फिसड्डी और धीमा काम प्राइमरी और मिडिल स्कूलों का है। नर्सरी से प्राइमरी तक अध्ययनरत 3 लाख 65 हजार 71 विद्यार्थियों में से मात्र 18 हजार 705 विद्यार्थियों की ही आईडी बनाई जा सकी हैं। यानी मात्र 5% काम ही हुआ है। हाई स्कूल हायर सेकंडरी में अध्ययनरत 1 लाख 32 हजार 765 विद्यार्थियों में से मात्र 27 हजार 63 विद्यार्थियों की आईडी ही बन सकी हैं। यहां भी महज 20.4% ही काम हुआ है। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में सबसे कम गति से काम हो रहा है। निजी स्कूल संचालक जिस तरह से अन्य गतिविधियों में सक्रियता दिखाते हैं, वैसी तेजी अपार आईडी बनाने को लेकर नहीं दिखाई दे रही। इन्हीं सब कारणों से यह काम लेट हो रहा है। 12 अंकों की यूनिक आईडी होगी अपार, जीवनभर आएगी काम अपार आईडी में प्रत्येक विद्यार्थी के शैक्षणिक इतिहास का विस्तृत और स्थायी अभिलेख बनाया जा सकेगा। जिसमें पाठयक्रम, अंकतालिका, प्रमाणपत्र व अन्य उपलब्धियां शामिल होंगी। अपार प्रत्येक विद्यार्थी की 12 अंकों की एक यूनिक आईडी होगी, जिसे यू-डाइस प्लस पोर्टल के माध्यम से जनरेट किया जाना है। यह आईडी विद्यार्थी के जीवन पर्यन्त यूनिक शैक्षणिक पहचान के रूप में काम आएगी, अपार आईडी को डिजी लॉकर से संबद्ध कर विद्यार्थी की सभी उपलब्धियां एक जगह प्राप्त होंगी। विद्यार्थी कहीं से भी किसी भी समय अपने शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। शैक्षणिक संस्थानों के मध्य स्थानांतरण, कौशल, नौकरी व उच्च शिक्षा के लिए आवेदन के समय संलग्न आसानी से हो सकेंगे। विद्यार्थियों के दस्तावेज वास्तविक समय अपडेट हो सकेंगे। अब तक बड़ी कार्रवाई नहीं, इसलिए बेफिक्र संचालक अपार आईडी का काम विद्यार्थियों के भविष्य से सीधा जुड़ा हुआ है। बावजूद इसके इस काम में स्कूल के प्राचार्यों और संचालकों द्वारा रुचि नहीं दिखाने के मामले में चेतावनी पत्र और नोटिस तो जारी हो रहे हैं परंतु अब तक बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। यदि सख्ती की जाती है और ठोस कार्रवाई होती है तो इस काम में तेजी देखने को मिल सकती है। तीन दिन में सुधार नहीं होने पर कार्रवाई जिन स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को नोटिस जारी किए गए हैं, 3 दिन में उनमें अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अन्य सभी स्कूलों की मॉनिटरिंग भी हो रही है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी।- अरविंद जैन, डीईओ सागर

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