नाबार्ड अगले साल देगा 11 प्रतिशत अधिक लोन:₹4.88 लाख करोड़ का प्राथमिकता क्षेत्र ऋण बांटने की संभावना; कृषि-एमएसएमई को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

राज्य में ग्रामीण, कृषि और औद्योगिक विकास को मजबूती देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹4.88 लाख करोड़ के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण का आकलन किया है। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। यह दस्तावेज जिलेवार भौतिक और वित्तीय दृष्टि से ऋण क्षमता का समेकित आकलन प्रस्तुत करता है। स्टेट क्रेडिट सेमिनार में स्टेट फोकस पेपर का विमोचन
नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए स्टेट फोकस पेपर (SFP) का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने Strengthening Infrastructure in Rajasthan under RIDF राज्य में एफपीओ की सफलता की कहानियां शीर्षक से प्रकाशित दो अन्य पुस्तिकाओं का भी लोकार्पण किया। मुख्य सचिव ने कहा- नाबार्ड की यह पहल राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप वित्तीय संस्थानों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी। ₹6.11 लाख करोड़ के बजट को बताया विकास की मजबूत नींव
मुख्य सचिव ने राज्य के ₹6.11 लाख करोड़ के बजट परिव्यय को विकास की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट कृषि, ग्रामीण सड़कों, पेयजल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। उन्होंने बैंकों, विभागों और अन्य हितधारकों से नाबार्ड के अनुमानों को हासिल करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की। साथ ही कम्प्यूटरीकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता के जरिए सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की। एमएसएमई क्षेत्र को बताया विकास की धुरी
एसीएस-इंडस्ट्रीज एवं एमएसएमई शिखर अग्रवाल ने कहा- एमएसएमई क्षेत्र औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मूल्यवर्धन में अहम योगदान दे रहा है। उन्होंने समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी की जरूरत
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव अजिताभ शर्मा ने पीएम सूर्यघर योजना के तहत कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं के माध्यम से पीपीएफ मोड में बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को गति दी जा सकती है। नाबार्ड सीजीएम ने बताई ऋण क्षमता
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर रवि बाबू ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए राजस्थान की कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹4.88 लाख करोड़ आंकी गई है, जो विकसित Rajasthan@2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने बताया- कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां: ₹2.24 लाख करोड़ एमएसएमई क्षेत्र: ₹2.27 लाख करोड़ यह दर्शाता है कि राज्य का विकास अब कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच संतुलित हो रहा है। वार्षिक ऋण योजना का बनेगा आधार
सीजीएम ने कहा- स्टेट फोकस पेपर वर्ष 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना तैयार करने के लिए बेंचमार्क के रूप में कार्य करेगा। इससे अंतिम छोर तक ऋण पहुंच, महिला किसानों और सहकारी संस्थाओं का सशक्तिकरण तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा। पीएसीएस और एफपीओ के प्रयासों की सराहना
सेमिनार के दौरान 2025-26 में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस), बहुउद्देश्यीय पीएसीएस, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और किसान उत्पादक संगठनों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की गई। कार्यक्रम में सहकारिता विभाग, वित्त विभाग, पशुपालन विभाग, आरसीडीएफ, एसएलबीसी, भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रतिनिधि, वरिष्ठ बैंकरों और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के समग्र विकास को मिलेगी नई गति
स्टेट क्रेडिट सेमिनार के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि वर्ष 2026-27 में कृषि, एमएसएमई, सहकारिता, बुनियादी ढांचा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर राजस्थान को समग्र और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

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