नाबालिग से गैंगरेप का मामला, दो आरोपी अब तक फरार:एनएसयूआई ने गिरफ्तारी की मांग को सौंपा ज्ञापन, कहा- पांच दिनों में गिरफ्तारी नहीं तो करेंगे उग्र आंदोलन

लोक निर्माण विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर नाबालिग युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फरार आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में दुर्ग अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर को ज्ञापन सौंपते हुए एनएसयूआई ने पांच दिनों के अंदर फरार आरोपियों के गिरफ्तारी की मांग की गई है। एनएसयूआई ने कहा है कि अगर पांच दिनों के अंदर आरोपी गिरफ्तार नहीं होते हैं तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह ने कहा कि पीड़िता की शिकायत पर दुर्ग पुलिस ने 30 जनवरी को कुल 6 लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया था। हालांकि अब तक केवल 4 आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकी है, जबकि दो रसूखदार आरोपी अब भी फरार हैं। फरार आरोपितों में भीम नारायण पाण्डेय और संजय पंडित का नाम शामिल है। सांसद के निज सचिव होने की वजह से नहीं हो रही गिरफ्तारी
एनएसयूआई का कहना है कि दो आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। 12 से 13 दिन हो हैं लेकिन आज तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। कहीं न कहीं बीजेपी सांसद के दवाब में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। हमें पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे 5 दिन के अंदर फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी। अगर नहीं होता है तो हम उग्र आंदोलन करेंगे। बीजेपी सांसद के पूर्व पीए पर लगा है आरोप
एनएसयूआई ने बताया कि बीएन पांडेय उर्फ भीम नारायण पाण्डेय दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल के निज सहायक रह चुके हैं और सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका कार्यालय में आना-जाना बना रहता था। इस कारण आशंका जताई जा रही है कि पुलिस प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है और आरोपितों को संरक्षण दिया जा रहा है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि पुलिस प्रशासन पिछले 11 दिनों से जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है। अभी तक मामले में एसआईटी का गठन भी नहीं किया गया है, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हो रही है। सड़कों पर लड़ी जाएगी लड़ाई
इस मामले में एनएसयूआई के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ओर बीजेपी नारी सशक्तीकरण की बात करती है तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी के नेताओं के करीबी के उपर दुष्कर्म करने जैसे आरोप लग रहे हैं। पुलिस भी दवाब में कार्रवाई नहीं कर रही है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध करने वाले आरोपितों को संरक्षण देने वालों के नाम भी सार्वजनिक किए जाएंगे। पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अब सड़कों पर लड़ाई लड़ी जाएगी।

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