नारकोटिक्स विभाग ने किसानों से ली 1.16 लाख अफीम:CPS पद्धति के तौल का काम आगे बढ़ा, अधिकारियों की बढ़ी समस्या

नारकोटिक्स विभाग की ओर से अफीम का तौल किया जा रहा है। अब तक 7 दिनों में तीनों खंडों के 433 गांवों से 9844 किसानों ने अपनी अफीम तुलवाई। विभाग के पास कुल अभी तक 116214.29 किलो अफीम आ चुकी है। पहले और तीसरे खंड की अफीम तुलवाई का काम 12 अप्रैल तक और दूसरे खंड में 8 अप्रैल तक अफीम तुलाई का काम होगा। इसके बाद CPS पद्धति से डोडे तोले जाने वाले थे लेकिन नीमच गोदाम फूल हो जाने और नए गोदाम का रेडी नहीं होने के कारण अब डेट भी आगे बढ़ा दी गई। तीनों डिवीजन से मिली अफीम जिला मुख्यालय पर पहले और दूसरे डिवीजन का अफीम तौल किया जा रहा है। जबकि तीसरे खंड का तौल निंबाहेड़ा में किया जा रहा है। गम पद्धति का तौल पहले और तीसरे डिविजन में 12 अप्रैल और दूसरे डिवीजन में 8 अप्रैल तक होना है। पहले डिवीजन में 183 गांवों के 3103 किसानों ने 60862.48 किलो अफीम तुलाई। इसी तरह, दूसरे डिवीजन के 128 गांवों के 3898 किसानों ने 32798.96 अफीम विभाग को दी। इसमें एक किसान की अफीम में बहुत ज्यादा वाटर मिक्स होने के कारण उसे सस्पेक्ट माना गया है। किसान के पास 7 किलो 510 ग्राम अफीम मिली जिसमें पानी की मिलावट ज्यादा है। इसी तरह तीसरे खंड के 122 गांवों के 2843 किसानों ने अपनी का तौल करवाया। विभाग ने किसानों से 22552.850 किलो अफीम ले चुके है। इसमें से एक किसान की 8.990 किलो अफीम सस्पेक्टेड थी। 10 दिन आगे बढ़ा काम, अधिकारियों की बढ़ी मुसीबत नारकोटिक्स विभाग के सामने एक नई समस्या सामने आ गई है। चित्तौड़गढ़ के तीनों डिविजन की अफीम को नीमच के गोदाम में भेजी जा रही है। गम पद्धति के अफीम तौल का काम खत्म होने के बाद CPS पद्धति से डोडो कार्टून शुरू होने वाला था लेकिन अब यह काम 10 दिन आगे बढ़ा दिया गया। अब तौल का काम 18 अप्रैल करने की संभावना है। इसका मुख्य कारण नहीं है कि नीमच के गोदाम फुल हो चुके हैं। जहां अफीम के डोडो को रखा जाना था वो गोदाम अभी बन कर तैयार भी नहीं हुआ। नीमच के मोरवन में एक नया गोदाम बनाया जा रहा है जहां ये डोडे रखे जाएंगे। लेकिन अब जिला अफीम अधिकारियों के सामने ये प्रॉब्लम हो गई है कि जो टेंट, कूलर, ट्रक बुक करवाए गए थे उनको एक्स्ट्रा पेमेंट करना होगा। जिससे राजस्व नुकसान होगा। हर डिवीजन के पंखे, कूलर, टेंट सहित हर दिन का खर्चा लगभग 22 हजार रुपए का है। जबकि नीमच तक अफीम को ले जाने वाले ट्रक का भी रोज का किराया लगभग 13000 रुपए का है। इसी तरह, सीसीटीवी कैमरे, पानी की व्यवस्था सहित कई व्यवस्थाओं को फिर से शुरू करना होगा। अफीम अधिकारियों की लगातार इस बारे में बातचीत चल रही है। सभी को समझाया जा रहा है। सबसे ज्यादा मार्फिन एवरेज देने के लिए किसान को किया सम्मानित पहले डिविजन के अधिकारियों द्वारा एक नवाचार करते हुए पिछले साल सबसे ज्यादा मार्फिन एवरेज देने वाले किसान को सबके सामने सम्मानित किया गया। उन्होंने अन्य सभी किसानों को इसके लिए मोटिवेट भी किया। अधिकारियों का कहना है कि 4.2 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर मार्फिन का एवरेज होता है। इसके लिए किस हमेशा परेशान भी रहते हैं। अगर वह मार्फिन एवरेज को पूरा नहीं कर पाते हैं तो उनके अफीम का लाइसेंस कट जाता है और उन्हें CPS पद्धति का लाइसेंस मिल जाता है। लेकिन पिछले साल अफीम किसान रोजड़ा गांव के भेरूलाल अहीर ने पूरे डिविजन में सबसे ज्यादा 8.564 प्रति हेक्टेयर मार्फिन एवरेज दिया है। अन्य किसानों को भी मोटिवेट करने के लिए यह पहल की गई। उन्हें अफीम अधिकारियों द्वारा समझाया भी गया कि उन्हें भी ऐसी कोशिश करनी चाहिए।

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