हरियाणा के नारनौल में गांव रामबास में एक बेटी की शादी से पूर्व परिजनों ने उसका धूमधाम से घोड़ी पर बैठाकर बनवारा निकाला। यह गांव राजस्थान की सीमा के साथ लगा हुआ है। जिसके चलते आसपास के गांवों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। नारनौल के समीपवर्ती रामबास गांव निवासी महेंद्र सिंह राजपूत और उनकी पत्नी मधु ने समाज में व्याप्त लड़का-लड़की के भेदभाव को नकारते हुए अपनी 21 वर्षीय बीए पास बेटी मोना का बनवारा घोड़ी पर बैठाकर निकालने का निर्णय लिया। परिवार के इस कदम को ग्रामीणों ने खुले दिल से सराहा और इसे समाज के लिए नई सोच का प्रतीक बताया। बारात जैसा बन गया माहौल जिसके बाद मोना को घोड़ी पर बैठाकर बनवारा परंपरागत तरीके से पूरे गांव में घुमाया गया। घोड़ी, सजावट और बारात जैसे माहौल ने पूरे आयोजन को उत्सव में बदल दिया। गांव की गलियों में जैसे ही बेटी घोड़ी पर सवार होकर निकली, लोग घरों से बाहर आ गए। बेटा-बेटी में नहीं अंतर लड़की के पिता महेंद्र सिंह ने बताया कि उनके लिए बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है, इसलिए उन्होंने बेटी के बनवारे को वही सम्मान दिया जो सामान्यतः बेटों को दिया जाता है। उनका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि बेटियाँ भी हर खुशी और अधिकार की बराबर हकदार हैं। राजस्थान से आएगी बारात मोना की शादी 19 फरवरी को राजस्थान के झुंझुनूं जिला के दुलवा निवासी राहित से होगी। रोहित सीआईएसएफ में टू स्टार अधिकारी लगा हुआ है। वहीं मोना के परिजन खेतीबाड़ी का काम करते हैं। मोना के पिता ने बताया कि यह बनवारा गांव के उनके दोस्त योगेश शर्मा ने दिया था। अनेक ग्रामीण रहे मौजूद इस मौके पर परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, चाचा-चाची, ताऊ-ताई तथा गांव के अनेक लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और ऐसे कदम समाज की सोच को सकारात्मक दिशा देते हैं।


