भास्कर न्यूज़ | अमृतसर निगम को चेक के जरिए भुगतान कर गुमराह करने वाले डिफाल्टरों पर अब कानूनी गाज गिरेगी। कमिश्नर ने बाउंस चेक के मामलों में सख्त आदेश जारी करते हुए न केवल जी-8 रसीद रद्द करने, बल्कि डिफॉल्टरों के खिलाफ अदालत में केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जारी निर्देश में लिखा है कि निगम को चूना लगाने वाले डिफाल्टरों की अब खैर नहीं है। किसी उपभोक्ता का चेक बैंक से बाउंस होकर वापस आता है, तो निगम न केवल उसकी रसीद रद्द करेगा, बल्कि उस पर जुर्माना लगाकर अदालत में केस भी दर्ज कराएगा। चेक बाउंस होते ही उस राशि के बदले जारी की गई जी-8 रसीद को सिस्टम से तुरंत डिलीट (रद्द) कर दिया जाएगा। इससे उपभोक्ता के खाते में वह राशि दोबारा बकाया दिखने लगेगी। प्रॉपर्टी टैक्स, रेंट एस्टेट और कंजर्वेसी चार्ज, जैसे विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चेक की मूल राशि के साथ-साथ बैंक द्वारा लगाया गया जुर्माना भी उपभोक्ता से ही वसूलें। डिप्टी कंट्रोलर के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए प्रशासन ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत लीगल सेल के माध्यम से कानूनी कार्यवाही करें। बता दें कि आप नगर निगम में कोई भुगतान करते हैं (जैसे प्रॉपर्टी टैक्स, पानी का बिल, या कोई लाइसेंस फीस), तो बदले में विभाग आपको जो रसीद काटकर देता है, उसे तकनीकी भाषा में जी-8 रसीद कहा जाता है।


