निजी बसों की हड़ताल:दूसरी वार्ता भी विफल; अफसरों को हटाने पर अड़े बस संचालक, 25 लाख यात्रियों को भटकना पड़ा

प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और परिवहन विभाग के बीच मंगलवार को दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रहने से हड़ताल पर गतिरोध और गहरा गया है। परिवहन आयुक्त के साथ हुई बैठक में सहमति नहीं बन पाई। ऑपरेटर्स ने अब आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र चौधरी और इंस्पेक्टर राजेश चौधरी को एपीओ करने की पहली शर्त रख दी है। उनका कहना है कि इन अधिकारियों को एपीओ किए जाने के बाद ही तीसरे दौर की वार्ता होगी। इससे पहले ऑपरेटर्स यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें सीज नहीं करने, एआईपीपी परमिट टैक्स को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की तर्ज पर स्लैब में कम करने, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत कार्रवाई बंद करने और भारी-भरकम चालानों पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। दूसरी ओर, प्राइवेट बसों की हड़ताल के कारण मंगलवार को प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई। बस स्टैंड पर भीड़ इतनी रही कि कई यात्रियों को बसों की छतों पर सफर करना पड़ा। सुबह पहुंचे यात्रियों को दोपहर बाद बसें मिल सकीं। 35 हजार की जगह 3300 बसें ही दौड़ीं; कई समारोह कैंसिल सामान्य दिनों में प्रदेश में प्राइवेट और रोडवेज की करीब 35 हजार बसों का संचालन होता है और रोजाना लगभग 25 लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन हड़ताल के बाद अब केवल रोडवेज की 3300 बसें ही संचालित हो रही हैं। 15 हजार प्राइवेट स्लीपर कोच बसों से रोजाना 6 लाख और 20 हजार लोक परिवहन सेवा व स्टेज कैरिज बसों से करीब 12 लाख यात्री यात्रा करते थे, जो हड़ताल से प्रभावित हुए हैं। रोडवेज बसों से प्रतिदिन करीब 7 लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन अचानक बढ़े दबाव से व्यवस्था चरमरा गई। खाटूश्यामजी और होली पर घर जाने वाले लोग भटकते रहे। दूसरे राज्यों के श्याम भक्त जयपुर में ही फंस गए। पूरे प्रदेश में कई समारोह कैंसिल करने पड़े। आरटीओ इंस्पेक्टर और ऑपरेटर्स आमने-सामने इन रूट पर अधिक असर- प्राइवेट बसों की हड़ताल का असर खाटूश्यामजी जाने वाले यात्रियों पर सबसे अधिक पड़ा है। यात्रियों को तीन-तीन घंटे इंतजार के बाद बसें मिलीं। रोडवेज ने वाया हीरापुरा बस स्टैंड होकर खाटूश्यामजी जाने वाली बसों का संचालन बंद कर दिया है। ऐसे में हीरापुरा से यात्रियों को 10 किमी दूर सिंधी कैंप आना पड़ रहा है। बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, हिसार, श्रीमाधोपुर, खेतड़ी, सीकर, चूरू, सालासर, झुंझुनूं, पिलानी, लाडनूं, सरदारशहर, सांभर, फुलेरा, कुचामन आदि रूट सबसे अधिक प्रभावित रहे। सिंधी कैंप बस स्टैंड के सामने लोक परिवहन सेवा की बसें जबरन चलाने के आरोप को लेकर आरटीओ इंस्पेक्टर और बस ऑपरेटर्स आमने-सामने हो गए। दोपहर करीब 3 बजे दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक नोकझोंक होती रही। राजस्थान बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा और महासचिव प्रवीण अग्रवाल अन्य ऑपरेटर्स के साथ मौके पर पहुंचे। ऑपरेटर्स ने बसों में बैठे यात्रियों को उतारकर विरोध जताया और इंस्पेक्टर के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची, तब जाकर मामला शांत हुआ।

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