नर्मदापुरम के मोहासा औद्योगिक क्षेत्र में सरकार जहां निवेश बढ़ाने और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों के उद्योगपतियों को सस्ती जमीन दे रही है, वहीं उसी जमीन से मिट्टी का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। माफिया खुलेआम खुदाई कर मिट्टी का परिवहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। फेस-टू में चल रहा काम सूत्रों के मुताबिक अवैध उत्खनन औद्योगिक क्षेत्र के फेस-टू में हो रहा है। यहां कंपनियों को प्लांट लगाने के लिए जमीन आवंटित की जानी है। आरोप है कि प्लॉट विकसित होने से पहले ही माफिया जमीन को खोखला कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनका हौसला बढ़ गया है। यही वजह है कि उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा। पहले भी सामने आ चुका मामला मोहासा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध उत्खनन का यह पहला मामला नहीं है। करीब डेढ़ महीने पहले फेस-वन के प्लॉट नंबर 18 से बड़े पैमाने पर मिट्टी चोरी का मामला सामने आया था। तब माफिया करीब 12 हजार 683 घनमीटर मिट्टी, यानी एक हजार से ज्यादा डंपर भरकर ले गए थे। सूत्रों का दावा है कि यह मिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में ही स्थापित और निर्माणाधीन कुछ बड़ी कंपनियों में डाली गई। मामला उजागर होने पर खुली नींद जब यह मामला मीडिया में सामने आया, तब प्रशासन हरकत में आया। जिला खनिज अधिकारी, एसडीएम, नायब तहसीलदार और पटवारी मौके पर पहुंचे और खुदाई वाली जगह की नपती कराई। नपती में अवैध उत्खनन की पुष्टि तो हुई, लेकिन पंचनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मिट्टी किसने खोदी, कहां ले जाई गई और उसका उपयोग कहां हुआ। दूसरी बार बनाना पड़ा पंचनामा इसके बाद संयुक्त टीम को दोबारा मौके पर पहुंचकर नया पंचनामा तैयार करना पड़ा। बाद में खनिज विभाग ने देरी से अवैध उत्खनन का प्रकरण बनाकर अपर कलेक्टर के पास भेजा। ग्रामीणों का कहना है कि फेस-टू में जमीनों की रजिस्ट्री का काम जारी है और आगे प्लॉट काटे जाने हैं। इससे पहले ही बिजली ग्रिड के आसपास बिना अनुमति मिट्टी खोदकर ले जाई जा रही है। अफसरों के बयान एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक महेंद्र वर्मा ने कहा कि उन्हें अवैध उत्खनन की जानकारी नहीं है। वे स्टाफ को भेजकर मौके की जांच करवाएंगे।
वहीं तहसीलदार महेंद्र चौहान ने बताया कि वे चौरागढ़ मेले में ड्यूटी पर हैं, जांच के लिए आरआई और पटवारी को भेजा जाएगा। जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम से संपर्क नहीं हो सका।


