राज्य सरकार की पंच गौरव योजना के तहत वन विभाग नई पहल कर जिलेभर में नीम के पेड़ों की क्यूआर कोडिंग करने जा रहा है। इसके लिए वन विभाग ने एक क्यूआर कोड जारी किया है। कोई भी आमजन आसपास के बड़े नीम के पेड़ की जानकारी देकर (नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित) क्यूआर कोड स्कैन कर फॉर्म भर सकता है। इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंचकर पेड़ की क्यूआर कोडिंग करेगी। 20-25 किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड सोखता है नीम जानकारी देने वाले व्यक्ति को विभाग की ओर से प्रमाण पत्र और उपहार भी दिए जाएंगे। यह पहल जन भागीदारी से नीम के पेड़ों की जनगणना और डाटाबेस तैयार करने में मदद के लिए की गई है। नीम सबसे महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों में से एक है। इसके पत्ते, छाल, बीज, फल और तेल से कई बीमारियों का इलाज होता है। ये पर्यावरण के लिए वायु शोधक है, प्रदूषण कम करता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। एक बड़ा नीम का परिपक्व पेड़ 10-15 मीटर ऊंचा होता है और औसतन सालाना 20-25 किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड सोखता है। डीएफओ पी बालामुरुगन ने बताया कि जिलेभर में कितने नीम के पेड़ हैं, इसका डेटाबेस तैयार करवाया जा रहा है। वन विभाग ने एक क्यूआर कोड जारी किया है, जिसे स्कैन कर एक फॉर्म खुलेगा। इसमें आपके बारे में सामान्य जानकारी और आपके आसपास के बड़े नीम के पेड़ की जानकारी देनी होगी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर संबंधित पेड़ की क्यूआर कोडिंग करेगी। जानकारी देने वाले लोगों को सर्टिफिकेट और उपहार दिया जाना भी योजना का हिस्सा है। नर्सरी में एकत्र कर रहे बीज किशनगढ़ और घूघरा नर्सरी में नीम के बीज एकत्रित किए जा रहे हैं। इनसे तैयार पौधों को अगले मानसून में ‘एक व्यक्ति एक नीम का पेड़’ अभियान के तहत वितरित किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह योजना न केवल नीम के संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेगी।


