उदयपुर शहर भाजपा नेताओं से जुड़ा कथित वीडियो कांड शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में फिर गूंजा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि उदयपुर फाइल्स की पूरे प्रदेश में चर्चा है। इसके बहुत ज्यादा दस्तावेज मेरे पास हैं। उदयपुर फाइल्स तो एपस्टीन फाइल्स से भी बड़ी है। सदन की मर्यादा रख रहा हूं, नहीं तो इससे जुड़े एक-एक व्यक्ति (भाजपा नेताओं) की परतें यहीं खोल देता। उन्होंने सीएम भजनलाल शर्मा से कहा कि मुख्यमंत्री जी आप भले आदमी हैं। आपको तो पता ही नहीं है, दिल्ली से एक केंद्रीय मंत्री का फोन सीधे उदयपुर रेंज के सबसे बड़े अधिकारी के पास पहुंचा और उसके बाद गैरकानूनी तरीके से कानूनी कार्रवाई भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस ने की। मुख्यमंत्री जी इस उदयपुर फाइल्स में क्या है? आप सच्चाई का साथ देना चाहते हैं तो इस पूरे प्रकरण की सच्चाई से जांच कराइए। चाहे भाजपा के नेता हों तो भी ऐसे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्या भाजपा नेताओं का यही कृत्य रह गया है कि वे इस प्रकार का कार्य करें। ऐसे व्यक्तियों को सख्त-से-सख्त सजा मिलनी चाहिए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जूली के इस बयान के बीच विधानसभा में बैठे सत्ता पक्ष के किसी भी मंत्री-विधायक ने विरोध तक दर्ज नहीं कराया। जबकि, ऐसे मामलों में तीखी नोकझोंक होना आमबात है। बता दें, उदयपुर फाइल्स में भाजपा नेत्री के संग शहर भाजपा से लेकर प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं के तथाकथित आपत्तिजनक वीडियो बताए जा रहे हैं, जिसके लिए आरोपी अधिवक्ता विशाल गुर्जर भाजपा नेताओं को ब्लैकमेल कर रहा था। हालांकि, भाजपा नेत्री ने अधिवक्ता विशाल के खिलाफ एआई से कुछ भाजपा नेताओं संग उसके आपत्तिजनक वीडियो-फोटो बनाकर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने का मुकदमा दर्ज कराया। -मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला, आरोपी अधिवक्ता व उसके घर का गेट तोड़ने वाले भी भाजपा कार्यकर्ता, पुलिस ने जब्ती के वीडियो बनाकर ई-साक्ष्य पर क्यों अपलोड नहीं किए? नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा- एएसआई ने ही दूसरे सर्कल के डिप्टी को जांच सौंप दी
नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि एआई से आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाने वाली पीड़िता भी भाजपा की है। जिस अधिवक्ता विशाल गुर्जर पर आरोप हैं वह भी भाजपा का है। पुलिस के साथ आरोपी अधिवक्ता विशाल के घर पहुंचकर उसके घर का दरवाजा तोड़ने व तोड़फोड़ करने वाले भी भाजपा के हैं। गत 11 फरवरी को रात 10:50 बजे भाजपा नेत्री ने साथी अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। एएआई ने मुकदमा दर्ज कर एफआईआर में ही दूसरे सर्कल के डिप्टी को जांच सौंप दी। रात 2:20 बजे पुलिस आरोपी के घर पहुंचकर रैकी करती है। रात 3 बजे सब्बल-हथौड़ों से लैस भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस अधिकारी-जवान पहुंचते हैं। फिर आरोपी के घर के दरवाजे को तोड़ते हैं। सीसीटीवी कैमरे, डीवीआर, मोबाइल फोन जब्त किए। पुलिस जब भी जब्ती की कार्रवाई करती है तो वीडियो बनाकर आवश्यक रूप से पुलिस की एप ई-साक्ष्य पर अपलोड करने होते हैं। अभी तक अपलोड क्यों नहीं किए, क्या ऐसा राज है?
-आज पीएम की सभा के बाद वीडियो कांड से जुड़े नेताओं पर सख्त निर्णय ले सकती है भाजपा
राष्ट्रीय कार्यालय दिल्ली ने इस मामले की जानकारी लेते हुए प्रदेश कार्यालय जयपुर को निर्देश दिए हैं कि इस समस्या का समाधान तुरंत निकाला जाए। अब प्रदेश कार्यालय इस असमंजस में है कि अभी पद से हटाया तो संदेश सीधे जाएगा कि उनके पदाधिकारी-कार्यकर्ता इस वीडियो कांड में शामिल थे। इसलिए मामला ठंडा होने के बाद वीडियो कांड से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने पर मंथन चल रहा है। दूसरी तरफ पार्टी के बड़े पदाधिकारियों को यह भी डर सता रहा है कि कहीं वीडियो जल्द वायरल हो गए तो बात उनके ऊपर भी आएगी। फिर उनके लिए खुद का बचाव करना भी भारी पड़ेगा। कुछ पदाधिकारियों का मत है कि कार्यवाही अभी कर दी जाए। अब इस पर निर्णय शनिवार को अजमेर में पीएम नरेंद्र मोदी की सभा के बाद होगा। वहीं, इस वीडियो कांड से जुड़े भाजपा नेता दावा कर रहे हैं कि अब वीडियो वायरल नहीं होगा, क्योंकि सभी सबूत नष्ट कर दिए हैं। मोबाइल फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पुलिस के पास जब्त हैं।


