नेपानगर नागरिक साख सहकारी संस्था में 2017 से 2022 के बीच 8.85 करोड़ रुपए का घोटाला उजागर हुआ था। इसमें पुलिस ने 16 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस मामले में अब दो आरोपियों योगेश पिता पांडुरंग महाजन और राकेश पिता अरूण यादव को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। योगेश पर 23 लाख और राकेश पर 4 हजार रुपए के गबन का आरोप है। नेपानगर थाना प्रभारी ज्ञानू जायसवाल ने बताया कि नेपानगर नागरिक साख सहकारी संस्था मर्यादित में घोटाला उजागर हुआ था। तब 29 दिसंबर 2022 को सहकारिता निरीक्षक पांडुरंग सोनवणे ने इसकी शिकायत थाने में दर्ज कराई थी। 8 करोड़ 85 लाख रूपए के गबन मामल में आरोपी सुरेश वानखेड़े और 16 अन्य के खिलाफ धारा 420, 409, 434 के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले में पहले 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बुधवार को योगेश पिता पांडुरंग महाजन निवासी शाहपुर, राकेश पिता अरूण यादव निवासी सात नंबर गेट नेपानगर को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ कर न्यायालय रिमांड पर भेजा जाएगा। गबन मामले के एक आरोपी सुभाष यादव की 2023 में फिरोजाबाद यूपी में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि, तत्कालीन प्रबंधक शैलेंद्र मंडले, विजय प्रकाश शर्मा अभी फरार है। जल्द उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी। यह है पूरा मामला दरअसल, नेपानगर नागरिक सहकारी साख संस्था में कई जमाकर्ताओं का पैसा अटका हुआ था, जो वापस नहीं किया जा रहा था। इसी बीच कुछ साल पहले संस्था में बिजली बिल जमा नहीं किए जाने का मामला उजागर हुआ। तब पता चला कि संस्था में कुछ गड़बड़ है और लोग अपना पैसा वापस मांगने लगे। इसके बाद यहां आए दिन विवाद होते रहे। शिकायतें होने के बाद तत्कालीन कलेक्टर प्रवीण सिंह ने तत्कालीन एडीएम शैलेंद्र सोलंकी से जांच कराई तो 9 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ। तब सहकारिता विभाग के माध्यम से नेपा थाने में शिकायत कराई गई। 2022 में 16 आरोपियों पर दर्ज किया गया था केस इस मामले में कुल 16 आरोपियों पर केस दर्ज किया गया था। इसमें से 10 आरोपी पकड़े जा चुके है। जिन 16 आरोपियों पर केस दर्ज किया गया था, उनमें कैशियर सुरेश वानखेड़े, प्रबंधक सुभाष यादव, लेखापाल मुकेश तायड़े, तत्कालीन प्रबंधक शैलेष मांडले, उपाध्यक्ष सुभाष पाटिल, संचालक अशोक चौधरी, संचालक राजेंद्र महोदय, महिला उपाध्यक्ष सुमन बाई, संचालक सदस्य रमेश सिंह, लिपिक विजय प्रकाश शर्मा, संचालक सदस्य भीमराव वानखेड़े, संचालक वसंत पवार, संचालक संध्या सिंह, लिपिक योगेश महाजन, लिपिक राकेश जाधव और लेखापाल सुधीर महाजन शामिल थे।


