एक-दाे, पांच-दस रुपए की मार्केट में किल्लत है। बैंकाें में मिलते ही नहीं। आखिर क्याें? भास्कर ने इसकी पड़ताल की ताे सामने आया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से नए छाेटे नाेट आम ग्राहकाें को नहीं दिए जाता है। जबकि बाजार में कटे-फटे नाेट बदलने का बाेर्ड लगाकर कुछ लोग भारतीय नाेटाें काे बेचने और खरीदने का धंधा कर रहे हैं। जबकि रिजर्व बैंक के अनुसार काेई भी इस तरह न नाेट खरीद सकता है और न बेच सकता है। राजधानी जयपुर में बड़ी चाैपड़ व छाेटी चाैपड़ एरिया सहित शहर में खुलेआम ऐसे करीब 200 से 250 दलाल सक्रिय हैं। इस धंधे में मुनाफे के खेल का इस कदर है कि एक रुपए की साै नाेट की गड्डी 1600 रुपए में बिक रही है। यानी 16 गुना ज्यादा दाम में। ऐसे ही दाे रुपए की गड्डी के 100 नाेट के 2200 रुपए, पांच रुपए की गड्डी का 1500 रुपए में साैदा हाे रहा। शादी-ब्याह के सीजन में ताे ये छाेटे नाेट मुंह-मांगी कीमत पर बिकते हैं। जयपुर से पूरे प्रदेश में नाेटाें की अवैध रूप से सप्लाई हाे रही है। रोज बैंकों की तरह नोट खरीद-बेच रहे लोग दलाल: ऑर्डर करिए, 1 लाख क्या 10 लाख के मिल जाएंगे। दलाल: देखिए, हर दिन रेट बदलती है। एक और दाे रुपए ने नाेट थाेड़े मुश्किल है। एक रुपए की गड्डी के 1500 से 1600 रुपए लगेंगे। दलाल: ताे वहां से ले आओ। वहां मिलेगा ही नहीं। हमारे करीब तीन साै लाेग है। जयपुर क्या दिल्ली के बैंकाें से भी हम निकाल लाते हैं। दलाल: एक फाेन करने का काम है। आंगड़ियाें के मार्फत पैसा आता है। लाखाें रुपए राेज का काम करते हैं, बस हमें ताे कमीशन चाहिए। बैंक में नोट मिलते नहीं, रिजर्व बैंक ने काउंटर बंद कर दिया भास्कर रिपाेर्टर ने खुद जयपुर शहर सहित भीलवाड़ा के पांच बैंक शाखाओं में नए नाेट मांगे ताे आरबीआई से नहीं आने का तर्क देकर मना कर दिया। यह आम आदमी की स्थिति है। बैंकों में नए और छोटे नोट मिलते ही नहीं है। “आरबीआई किसी को भी पुराने या नए नाेट खरीदने-बेचने की अनुमति नहीं देता है।” राजीव चाैधरी, पब्लिक ऑफिसर, आरबीआई जयपुर


