भास्कर न्यूज| महासमुंद कहते हैं कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो और लक्ष्य के प्रति समर्पण अटूट, तो रास्ते की हर बाधा बौनी साबित होती है। इसे सच कर दिखाया है महासमुंद जिले के ग्राम बेलटुकरी (तुमगांव) निवासी संजय डहरिया (37) ने। संजय ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर 946वीं रैंक हासिल की है। उनकी इस सफलता से पूरे जिले में हर्ष का माहौल है। संजय की प्रारंभिक शिक्षा बेलटुकरी के प्राथमिक स्कूल में हुई। बचपन से ही मेधावी रहे संजय का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, रायपुर में हुआ, जहां उन्होंने कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की। वे अपने स्कूल के टॉपर रहे। उनकी इस यात्रा में शिक्षक सोनी सर, पंथराम साहू और बेदराम गिलहरे का विशेष मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने उन्हें नवोदय में पढ़ने के लिए प्रेरित किया। 12वीं के बाद संजय का सपना एमबीबीएस डॉक्टर बनने का था। पहली बार में उन्हें डेंटल सीट मिली, लेकिन वे एमबीबीएस ही करना चाहते थे। इसी बीच परिवार और जनप्रतिनिधियों की सलाह पर उन्होंने महासमुंद जनपद में शिक्षाकर्मी के रूप में कार्य शुरू किया। यह उनके करियर की पहली सीढ़ी थी। इसके बाद उन्होंने महासमुंद में पोस्ट मास्टर और फिर एसबीआई में नौकरी की। लेकिन उनका लक्ष्य बड़ा था, इसलिए उन्होंने बैंक की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। गंभीर बीमारी भी नहीं डिगा सकी हौसला: तैयारी के दौरान एक समय ऐसा आया जब संजय का स्वास्थ्य गंभीर रूप से खराब हो गया। उन्हें इलाज के लिए मुंबई जाना पड़ा। कठिन समय और शारीरिक कष्ट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। मुंबई से स्वस्थ होकर लौटने के बाद वे दुगुनी ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य में लग गए। साधारण परिवार, लेकिन उपलब्धियां असाधारण संजय के पिता लखनलाल डहरिया एक कृषक हैं और तुमगांव में कपड़े की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे संजय की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। संजय डहरिया का कहना है कि यह सफलता कठिन परिश्रम, धैर्य और परिवार के अटूट विश्वास का परिणाम है। स्वास्थ्य खराब होने के बाद लगा था कि सफर रुक जाएगा, लेकिन इरादों ने मुझे फिर से खड़ा कर दिया।


