भारत सरकार के उपक्रम न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने मप्र में 4 नए न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसके लिए नीमच के बासी, देवास के बावड़ीखेड़ा, सिवनी के किंडराई और शिवपुरी के खाकरोन में जगह का चयन प्रारंभिक रूप से हो गया है। एनपीसीआईएल जल्द डिटेल सर्वे करेगा। शुक्रवार को केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने बैठक बुलाई है। इसमें सर्वे को मंजूरी मिल सकती है। सब कुछ सही रहा तो दो से तीन साल में न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट का काम शुरू हो सकता है। केंद्र सरकार के उपक्रम एनटीपीसी की ओर से मप्र के मुख्य सचिव को इसकी जानकारी दे दी गई है। साथ ही महाप्रबंधक (न्यूक्लियर इंजीनियरिंग) एपी सामल को समन्वय का काम सौंप दिया है। मप्र के ऊर्जा विभाग की ओर से भी इन जिलों के कलेक्टरों को ताकीद कर दी गई है कि वे सर्वे में पूरा सहयोग दें। सर्वे में देखा जाएगा कि ऑटोमिक एनर्जी रेग्यूलेटरी बोर्ड के मापदंडों पर सबकुछ खरा निकले। चारों नए प्रोजेक्ट में 1200 मेगावॉट की दो यूनिट के साथ 6 यूनिट तक प्रस्तावित हैं। इसमें 1200 से लेकर 2000 एकड़ तक जमीन की जरूरत पड़ेगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार, ‘4 स्थानों का प्रारंभिक रूप से चयन हुआ है। स्थल चयन होने के बाद मप्र की विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इसमें 3 साल लग सकते हैं।’ प्रारंभिक रूप से ऐसे चुनी गई चारों साइटें… इनमें आसपास बड़ी आबाद भी नहीं 1. बासी, नीमच
नीमच शहर से 65 किमी दूर। गांधी सागर डैम से 5 किमी की दूरी पर है। पांच किमी तक कोई बड़ी जनसंख्या नहीं। ठोस पत्थर (सेंड स्टोन) है। 2. बावड़ीखेड़ा, देवास
ओंकारेश्वर शहर से 27 किमी दूर। इंदिरा सागर बांध 24 किमी पर है। स्थल से 5 किमी तक बड़ी जनसंख्या नहीं है। यहां सेंड स्टोन है। 3. किंडराई, सिवनी
घंसौर शहर से 15 किमी दूर है। बरगी डेम 2 किमी दूर है। स्थल से पांच किमी तक कोई बड़ी जनसंख्या नहीं है। ठोस पत्थर (बेसाल्ट रॉक) है। 4. खाकरोन, शिवपुरी
मुंगावली शहर से 23 किमी दूर। राजघाट रिजर्व वायर 4.5 किमी दूर है। 5 किमी के दायरे में कोई बड़ी जनसंख्या नहीं है। यहां भी सेंड स्टोन है। 4 बिंदुओं पर सर्वे होगा, जिनमें हम फिट


