पंचायतीराज मंत्रालय ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आधुनिक तकनीक एआई के इस्तेमाल का विकल्प उपलब्ध करवा रहा है। पंचायतीराज मंत्रालय की एआई आधारित सभा सार पहल के अंतर्गत पंचायतों में आने वाले समय में फाइलों की ट्रैकिंग भी एआई से संभव हो सकेगी। इस पहल के पहले चरण में बैठकों का रिकॉर्ड संधारण करना शुरू किया है। अगले चरण में ग्रामीण विकास का डाटा विश्लेषण और विभागों की तर्ज पर पंचायत की फाइलों को भी ट्रैक किया जा सकेगा। ग्राम पंचायत के कर्मचारी और अधिकारी इन फाइलों का ऑनलाइन ही सत्यापन कर सकेंगे। प्रदेश में अब तक एआई से ढाई हजार से ज्यादा पंचायतों ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। प्रदेश की कुल 11180 पंचायतों (नवगठित को छोड़कर) में से अब तक 2683 पंचायतों ने इस एआई तकनीक का उपयोग करना शुरू कर दिया है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा बांसवाड़ा जिले में 417 पंचायतों में से 269 पंचायतों ने तकनीक का लाभ उठाया है। इसके बाद बीकानेर में 364 में से 258 पंचायतों ने एआई का उपयोग किया है। तीसरे नंबर पर झालावाड़ जिला है। यहां की 254 पंचायतों में से 231 में इस तकनीक को जोड़ा है।
इसी तरह हनुमानगढ़ की 268 ग्राम पंचायतों में से 213 और राजसमंद की 213 में से 200 पंचायतों ने इस नवाचार को लागू किया है। झुंझुनूं की 333 में से 154, अलवर की 552 में से 182, भरतपुर की 401 में से 152 और जैसलमेर की 206 में से 118 पंचायतों में एआई आधारित काम शुरू हो चुका है। बाड़मेर की 686 पंचायतों में से 116, चित्तौड़गढ़ की 298 में से 105, करौली की 240 में से 98, डूंगरपुर की 353 में से 97 और नागौर की 496 में से 84 पंचायतों ने इस तकनीक को अपनाया है। धौलपुर की 188 में से 71, जोधपुर की 620 में से 67, अजमेर की 322 में से 66 और गंगानगर की 345 में से 66 पंचायतों ने भी आधुनिक तकनीक से मदद लेना शुरू किया है। प्रतापगढ़ की 233 पंचायतों में से 52, भीलवाड़ा की 396 में से 48, बूंदी की 182 में से 45, दौसा की 279 में से 43, चूरू की 304 में से 40, सवाई माधोपुर की 224 में से 36, जयपुर की 579 में से 36, पाली की 338 में से 34, सिरोही की 171 में से 33, सीकर की 371 में से 30 और उदयपुर की 650 में से मात्र 16 पंचायतें ही एआई का इस्तेमाल कर पाई हैं। सबसे कम तकनीक उपयोग वाले जिलों में टोंक की 232 में से 11, जालोर की 305 में से 7 और कोटा की 155 में से मात्र 6 पंचायतें शामिल हैं। राजसमंद की 93.8 % पंचायतों में एआई का उपयोग एआई के इस्तेमाल में राजसमंद जिला प्रदेश में तकनीकी नवाचार के लिहाज से अव्वल रहा है। जहां की 93.8% पंचायतें एआई का उपयोग कर रही हैं। इसके बाद झालावाड़ की 90.9% पंचायतों ने इसे अपनाया है। अन्य जिलों में हनुमानगढ़ 79.4%, बीकानेर 70.8% और बांसवाड़ा 64.5% शामिल है। जबकि उदयपुर की मात्र 2.4% पंचायतें ही इसका फायदा ले रही है। इसी तरह जालोर 2.2%, कोटा 3.8%, टोंक 4.7% और राजधानी जयपुर में मात्र 6.2% पंचायतों ने ही एआई का इस्तेमाल किया है।


