पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच इस बार चर्चा वोटिंग मशीनों से ज्यादा जिला प्रशासन द्वारा जारी 60 लाख रुपए के ऑनलाइन खानपान टेंडर को लेकर है। टेंडर की शर्तों में चुनावी ड्यूटी पर तैनात सामान्य कर्मचारियों और अधिकारियों के भोजन में स्पष्ट अंतर सामने आया है, जिस पर कर्मचारी संगठनों ने समानता के अधिकार का मुद्दा उठाया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेरसिंह चौहान का कहना है कि चुनावी ड्यूटी में सभी कार्मिक समान रूप से कार्य करते हैं। अधिकारियों को भी कर्मचारियों के साथ बैठकर भोजन करना चाहिए, इससे भाईचारा और मनोबल दोनों बढ़ेंगे। अतिरिक्त कलेक्टर (प्रशासन) दीपेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व में भी ऐसे टेंडर होते रहे हैं। सामान्य भोजन और नाश्ते में बड़ा अंतर नहीं है। खाने के साथ नाश्ते में भी कर्मचारियों से भेदभाव सामान्य भोजन में 8 पूड़ी, एक सब्जी, दाल और अचार शामिल हैं। उन्नत पैकेट में मिक्स वेज, दाल मखानी, केर-सांगरी, मटर पुलाव, देशी घी की मिठाई, 6 रोटी, 8 पूड़ी, नमकीन और अचार का प्रावधान है। ऐसे कुल 26,500 पैकेट प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के लिए 2,000 प्लेटों का प्रावधान है। मेनू में पनीर की सब्जी, भिंडी या अतिरिक्त मिक्स वेज, शाही पुलाव, पाइन-एप्पल रायता या दही बड़ा, ग्रीन/अंकुरित सलाद, दो प्रकार की चटनी, पापड़, शुगर-फ्री काजू या बादाम कतली, 6 बटर तवा रोटी और 8 पूड़ी शामिल हैं। वहीं नाश्ते में कर्मचारियों को कचोरी, आलू वड़ा, ब्रेड बड़ा या पोहा के साथ सामान्य चाय-कॉफी दी जाएगी। अधिकारियों के लिए सिरेमिक कप में ऑफिसर टी, चीज सैंडविच, कटलेट, खमण, पराठा, इडली-सांभर, उपमा, मूंगदाल हलवा या जलेबी, मूंगदाल पकौड़ी या ब्रेड बड़ा और मौसमी फल प्लेट का प्रावधान है।


