कांडी | स्थानीय प्रखंड अंतर्गत हरिहरपुर ओपी क्षेत्र के मझिगावां पंचायत में आयोजित पंचायत स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल मैच शनिवार को खेला गया। मैच का उद्घाटन हरिहरपुर ओपी के एसआई वीरेंद्र चौड़े, मझिगावां मुखिया प्रतिनिधि शंभू नाथ साह तथा उपमुखिया श्रवण पासवान ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। फाइनल मुकाबले में मझिगावां बस्ती की टीम ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भेलवाखाड़ी की टीम ने निर्धारित 16 ओवरों में 4 विकेट खोकर 173 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से सतेंद्र ने सर्वाधिक 44 रन की पारी खेली। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी मझिगावां बस्ती की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पूरी टीम निर्धारित 16 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 140 रन ही बना सकी। मझिगावां बस्ती की ओर से हर्षित चौबे ने सर्वाधिक 82 रन बनाए। लेकिन टीम को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सके। इस प्रकार भेलवाखाड़ी की टीम ने मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया। मैच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रंजन कुमार को मैन ऑफ द मैच तथा लव उत्कर्ष तिवारी को मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर एसआई वीरेंद्र चौड़े ने कहा कि ऐसे पंचायत स्तरीय खेल के आयोजन से स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और खेल के प्रति उनका उत्साह बढ़ता है। इस मौके पर रामप्यारी ठाकुर, राजू चौबे, अरुण मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे और लोगों ने मैच का आनंद लिया। गढ़वा | झारखंड सरकार जहां एक ओर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर गढ़वा जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। जिले में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए उपलब्ध कराई गई एंबुलेंसों में से अधिकांश खराब पड़ी हैं, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार गढ़वा जिले में मरीजों की सुविधा के लिए कुल 26 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। लेकिन इनमें से वर्तमान में सिर्फ 10 से 12 एंबुलेंस ही चलने की स्थिति में हैं। बाकी एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण खड़ी हैं। जो एंबुलेंस चल भी रही हैं, वे भी अक्सर रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। बताया जाता है कि कई बार गढ़वा से पलामू या अन्य अस्पतालों में मरीज को लेकर जाते समय एंबुलेंस रास्ते में ही खराब हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में तो मरीज को एक एंबुलेंस से उतारकर दूसरी एंबुलेंस में बैठाकर अस्पताल पहुंचाया जाता है। इस दौरान एंबुलेंस चालकों को भी मरीज के परिजनों की नाराजगी और शिकायतों का सामना करना पड़ता है।


