पंजाब में वार्डबंदी को लेकर हाईकोर्ट ने अपना स्टे बरकरार रखा है। बता दे कि मोगा नगर निगम की वार्डबंदी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख 18 मार्च तय की है। इस फैसले से राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों में देरी होने की संभावना है। दरअसल मोगा नगर निगम की वार्डबंदी को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विपक्षी दलों का तर्क था कि मोगा शहर की आबादी में कोई वृद्धि नहीं हुई है और न ही कोई नया क्षेत्र शामिल किया गया है, ऐसे में नई वार्डबंदी की आवश्यकता नहीं थी। विपक्षी दलों ने पहले नगर निगम कमिश्नर के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। पंजाब में हुई थी निगमों और पार्षदों के लिए नई वार्डबंदी वहीं जब उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक यह स्पष्ट किया था कि देश भर में बिना किसी ठोस कारण के कोई नई वार्डबंदी नहीं होगी। हालांकि, पंजाब सरकार ने इन नियमों को दरकिनार करते हुए 10 जनवरी 2026 तक राज्य भर के निगमों और पार्षदों के लिए नई वार्डबंदी कर दी थी। निकाय चुनावों में देरी होने की संभावना हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव पर रोक लगा दी थी और राज्य सरकार को एक हलफनामा पेश करने का आदेश दिया था। इस हलफनामे में सरकार को यह स्पष्ट करना था कि वार्डबंदी क्यों करवाई गई और केंद्र सरकार के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, सरकारी पक्ष के वकीलों ने हाईकोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में केंद्र सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए समय की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब में सत्तारूढ़ दल की योजना के अनुसार चुनाव जल्द नहीं होंगे।


