पंजाब बचाओ रैली: वर्करों को लंगर से पंडाल में लाने की रणिके को संभालनी पड़ी कमान

गुरमीत लूथरा | अमृतसर पूर्व अकाली मंत्री गुलजार सिंह रणिके को पंजाब बचाओ रैली में वर्करों को जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दाना मंडी में रैली का समय सुबह 10 बजे से था मगर 11 बजे तक अगली कुर्सियों पर 100-150 वर्कर ही विराजमान थे। इसके बाद 11.45 मिनट पर करीब 500 तक ही पहुंच पाई। इस दौरान पहले ढाई घंटे तक मंच संचालक अमरबीर सिंह सयाली को कम से कम 100 बार वर्करों को लंगर छोड़कर पंडाल में कुर्सियों पर बैठने की अपील की। कुर्सियां न भरती देख रणीके ने खुद कमान संभाली तथा मंच से खुद अपील करने के बाद लंगर स्थल की ओर गए। लंगर स्थल पर जुटे वर्करों को जल्दी लंगर छकने के बाद कुर्सियों पर विराजमान होने की अपील की। उन्होंने खुद पंडाल के अंत वाली कतारों में जाकर संगत को कुर्सियों पर बैठकर नेताओं के विचार सुनने की अपील की। मंच संचालक सयाली, रणीके व उनकी पत्नी कंवलजीत कौर रणिके को भी मंच से संगत को कम से कम 50 बार अनाउंस करना पड़ा कि सुखबीर बादल व बिक्रम मजीठिया जल्द पहुंच रहे हैं इसलिए वह पंडाल में कुर्सियों पर बैठ जाएं। अखिरकार एक बजे तक 75 प्रतिशत रैली स्थल भरने के बाद करीब एक बजे से अंतिम अनाउंसमेंट की गई कि मांझे के जरनैल मजीठिया 10 मिनट में यहां पहुंच रहे हैं तथा वह आते ही संगत को संबोधित करेंगे। मजीठिया दोपहर 1.10 बजे रैली में पहुंचे और इसके बाद 1.25 बजे तक सुखबीर बादल भी पहुंच गए। दोनों नेतआों के पहुंचने पर संगत ने पूरे उत्साह से न सिर्फ नेताओं को सुना बल्कि सुखबीर बादल, अकाली दल बादल, बिक्रम मजीठिया जिंदाबाद के नारे भी लगाए। रैली में 5 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। बादल और मजीठिया ने कम से कम 3 बार रैली में मौजूद लोगों को हाथ जोड़कर इस बार अन्य पार्टियों के झांसे में न आकर 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान अकाली सरकार बनाने की अपील की। रैली में भाजपा भी बादल के निशाने पर रही, यही वजह है कि मतदाताओं को की गई अपीलों के दौरान सुखबीर बादल व बिक्रम मजीठिया ने एक बार भी भाजपा के साथ गठबंधन होने की संभावना का नाम नहीं लिया। कई बार सिर्फ दोनों नेताओं ने अकाली सरकार बनाने की गुहार ही लगाई।

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