राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब राज्य में 85 स्थानों पर खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। यह आदेश गुरदासपुर जिले के सीमावर्ती गांव गाहलड़ी की पंचायत द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए नई दिल्ली स्थित एनजीटी की मुख्य पीठ ने जारी किया। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। बता दे कि पंजाब सरकार के जल संसाधन विभाग ने पिछले साल इन 85 जगहों की पहचान की थी। हाल ही में इन स्थानों से रेत और बजरी निकालने के लिए टेंडर नोटिस भी जारी किए गए थे।गाहलड़ी पंचायत के वकील ने अपनी दलील में कहा कि चूंकि यह पूरा काम व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, इसलिए कानून के अनुसार पर्यावरण संबंधी मंजूरियां लेना अनिवार्य है। नदी से सामग्री निकालने का काम नहीं होगा शुरू पंचायत ने यह भी बताया कि उनका गांव नदी के निचले हिस्से में स्थित है और यदि यहां खुदाई की गई तो ग्रामीणों की जमीनों पर गंभीर असर पड़ेगा।वहीं एनजीटी ने इस मामले में संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “भले ही टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन नदी से सामग्री निकालने का काम शुरू नहीं होगा। पर्यावरण नियमों की हो रही अनदेखी गांव पंचायत के वकील ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि खनन की आड़ में पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जा रही है, जबकि व्यावसायिक स्तर पर की जाने वाली खुदाई के लिए आवश्यक मंजूरियां लेना अनिवार्य है। यह आदेश ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाढ़ के कारण जमानें हुई थी बर्बाद दरअसल पिछले साल अगस्त और सितंबर में पंजाब के कई इलाकों में आई भीषण बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जमीनें बर्बाद हो गई थीं। गांव के सरपंच गुरवीर सिंह और ग्रामीणों का मानना है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अवैध खनन के कारण नदियों के बांध कमजोर हो गए थे, जिसके चलते बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उधर, खनन विभाग के अधिकारी ने इस संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग इस मामले में कोई भी बयान एनजीटी के लिखित आदेशों को अच्छी तरह पढ़ने और समझने के बाद ही देगा।


