पंडो परिवारों को धमकाने वालों के खिलाफ दर्ज हुई FIR:विशेष संरक्षित जनजाति समुदाय के लोगों की जमीनों पर कब्जा, प्रशासन ने भेजा नोटिस

सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मांजा के राजाकटेल में विशेष संरक्षित पंडो जनजाति के लोगों को धमकी देने वालों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पंडो समुदाय के लोगों के करीब 50 एकड़ भूमि पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत पर अब ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इधर प्रशासन ने कब्जाधारियों को नोटिस भेजा है। शुक्रवार को राजकटेल गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्टोरेट पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई कि मुस्लिम समाज के सदस्यों के द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है एवं प्रताड़ित किया जा रहा है। एसपी को सौंपे गए आवेदन में उन्होंने बताया कि वे कई पीढ़ियों से अपनी पैतृक जमीन, राजाकटेल में रहते आए हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने उनके जमीन पर छलपूर्वक कब्जा कर लिया और अब अपने नाम से राजस्व रिकार्ड में दर्ज करा लिया है। जब पण्डो जनजाति के लोग कब्जा हटाने की बात करते हैं, तो आरोपियों ने परिवार को जान से मारने की धमकी दी है। दर्ज हुई FIR, SDM ने भेजा नोटिस
मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल से बात की और विशेष संरक्षित जनजाति वर्ग को प्रताड़ित करने वालों पर कार्रवाई की मांग रखी। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने मामले में बाबर खान, रफीक खान, रज्जाक अंसारी, रज्जाक की मां एवं अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 296(बी), 351(3), 3(5) एवं एससी, एसटी एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। वहीं सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर उदयपुर एसडीएम ने भी मामले में जांच तेज कर दी है। शिकायतों की जांच पर उदयपुर एसडीएम ने 7 कब्जाधारियों को धारा 170 ख का नोटिस भेजा है। वन अधिकार पत्र भी बनवाने का आरोप
ग्रामीणों ने शिकायत की है कि कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गांव की जमीन का वन अधिकार पट्टा भी बनवा लिया है। उन्होंने सरकारी जमीनों पर भी जबरदस्ती कब्जा कर लिया है। प्रशासन से इसकी भी जांच की मांग की गई है। नियमानुसार विशेष संरक्षित पंडो जनजाति की जमीनें गैर आदिवासी वर्ग के नाम पर दर्ज नहीं हो सकती और न ही इस वर्ग की जमीनों को बगैर कलेक्टर की अनुमति के खरीदा ही जा सकता है। प्रशासन इसकी भी जांच करा रहा है कि जमीनें गैर आदिवासी वर्ग के नाम पर कैसे दर्ज हो गईं।

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