पक्षियों के कलरव से जीवंत हुआ कसेकेरा… गणना में नजर आईं दुर्लभ प्रजातियां

भास्कर न्यूज | महासमुंद/कोमाखान भारत के पक्षी पुरुष कहे जाने वाले महान पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली की स्मृतियों से रचा-बसा ग्राम कसेकेरा एक बार फिर पक्षी प्रेमियों के कलरव से जीवंत हो उठा। विश्वव्यापी अभियान ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट के तहत 13 से 16 फरवरी तक आयोजित इस कार्यक्रम के अंतिम दिन कसेकेरा के बड़े तरिया और विज्ञान आश्रम में पक्षियों की सघन गणना की गई। धमतरी-कुरूद के पक्षी विज्ञानी प्रो. एचएन टंडन के नेतृत्व में पक्षियों की पहचान की गई। इस दौरान वैज्ञानिक पद्धति से प्रतिभागियों ने 15-15 मिनट के अंतराल पर पक्षियों के व्यवहार और संख्या का अवलोकन किया। एशियाई ग्रीन बी-ईटर बर्ड काउंट के दौरान कसेकेरा के जलाशयों और विज्ञान आश्रम के आसपास विभिन्न प्रजातियों का जमावड़ा देखा गया, जिनमें प्रमुख हैं लेसर व्हिसलिंग डक (बत्तख), ब्रोन्ज विंग्ड जकाना, एशियन ओपनबिल, इंडियन सिल्वरबिल, स्पॉटेड डॉव, लिटिल कॉरमोरेंट, इंडियन पौंड हेरोन, एशियन ग्रीन बी ईटर, इंडियन रोलर, ब्लैक ड्रेंगो, प्लेन प्रिनिया, पर्पल सनबर्ड और वायर टेल्ड स्वालो। ये सभी दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी है।

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