नीमच जिले के मांडा महेंद्री गांव के 50 से अधिक आदिवासी परिवारों ने अपनी जमीन के हक को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इन परिवारों को सरकार की ओर से खेती के लिए पट्टे तो मिल चुके हैं, लेकिन हकीकत में जमीन का भौतिक कब्जा आज तक नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों ने किसान नेता राजकुमार अहीर की अगुवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचकर नारेबाजी की और अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी। ग्रामीणों ने बताया कि पटवारी हल्का नंबर 33 के सर्वे नंबर तीन-दो में प्रत्येक पात्र व्यक्ति को एक-एक हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित की गई थी। कागजों में वे जमीन के मालिक हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई कब्जा नहीं है। आजीविका का संकट और अधिकारियों की बेरुखी पट्टे होने के बावजूद जमीन पर कब्जा न मिलने के कारण इन परिवारों के सामने जीवन-यापन और आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई वर्षों से इस समस्या को लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी उन्हें कब्जा दिलाने के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जल्द कब्जा न मिलने पर घेराव की चेतावनी ज्ञापन सौंपने के दौरान तुलसीराम भील, नंदलाल, केशुराम, सुखदेव, भागु, सुरेश, रामलाल रेगर, सालगराम, प्रभुलाल, कंवरलाल, श्यामलाल, भगतराम, कालुराम और प्रकाश सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही जमीन का सीमांकन कर उन्हें कब्जा नहीं दिलाया, तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव करने जैसा बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।


