भारत के दो पड़ोसी देशों बांग्लादेश और पाकिस्तान से रिश्तों का असर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के उर्स पर भी पड़ रहा है। इन दिनों बांग्लादेश से भारत के रिश्तों में खटास है, इसका नतीजा यह है कि पहली बार कलंदर व मलंगों का दल उर्स में शामिल नहीं हुआ। बांग्लादेश से 250 से अधिक कलंदर व मलंग आते हैं। जायरीन का आना भी मुश्किल लग रहा है। इधर, पाकिस्तान से रिश्ते स्थिर हैं, लेकिन इस बार वहां से भी कम ही जायरीन आ रहे हैं। बता दें कि हर साल बांग्लादेश से शाहीन बाबा की अगुवाई में एक दल कलंदर व मलंगाें का आता था। शाहीन बाबा इस दल के अमीर होते हैं। दल के सदस्य रूबल बाबा ने जानकारी दी कि टूरिस्ट वीजा नहीं मिलने से इस बार दल नहीं आ पाया। 50 लोग इस दल में आने वाले थे। सैयद जुल्फिकार चिश्ती भर्री बाबा ने बताया कि जकिया सुल्ताना की अगुवाई में बांग्लादेश का एक 50 सदस्यों का दल अलग से आता था। वीजा नहीं मिलने से वह भी नहीं आ रहा है। पिछले साल 250 लोगों का दल कलंदर व मलंगों के साथ दिल्ली से पैदल अजमेर पहुंचा था। पाकिस्तान से 264 जायरीन ही आएंगे
इस बार उर्स में 6 जनवरी को पाकिस्तान के 264 सदस्यों के दल के आने का कार्यक्रम है। इससे पहले करीब 500 का दल आता रहा है।


