5 जनवरी 2021…मंगलवार का दिन था। नागौर जिले के मूंडवा थाने में फोन पर सूचना मिली कि कस्बे के सरोवर के पास मंदिर से सटे घर में चारपाई पर किसी का लहूलुहान शव पड़ा है। तत्कालीन मूंडवा SHO बलदेवराम पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। लोगों ने पुलिस को बताया कि मृतक पुजारी के ही परिवार का सदस्य 35 साल का सुरेश वैष्णव हैं। पुलिस मकान के अंदर पहुंची, जहां चारपाई पर मृतक सुरेश वैष्णव (35) की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। खून के छींटे फर्श और दीवारों पर भी थे। घर की दीवारें काफी ऊंची थीं। इस कारण प्राइमरी लेवल पर ऐसा लग रहा था कि जिस ने भी ये मर्डर किया था, वह दीवार फांद कर तो घर में नहीं आया था। क्या इस मर्डर में घर के किसी सदस्य का हाथ है? अगर हाथ है तो वह कौन है? उसने हत्या क्यों की? ये तमाम सवाल SHO बलदेवराम के दिमाग में घूम रहे थे। SHO ने हत्याकांड की जानकारी तत्कालीन नागौर एसपी श्वेता धनखड़ सहित सभी उच्चाधिकारियों को दी। घटना की खबर मिलते ही तत्कालीन एएसपी राजेश मीणा, मुंडवा CO विजय कुमार सांखला और एसपी श्वेता धनखड़ घटनास्थल पर पहुंचे। सभी बड़े अधिकारियों ने मौका मुआयना किया। नागौर से एफएसएल की टीम और एमओबी टीम को मौके पर बुला कर साक्ष्य इकट्ठा किए। पुलिस टीम ने सुरेश वैष्णव के घरवालों से पूछताछ की। पूछताछ में घर वालों ने बताया कि सुरेश वैष्णव रात में पशुओं को चारा खिलाने गया था। चारा खिलाने के बाद बरामदे में चारपाई पर आ कर सो गया। अगली सुबह 5 जनवरी को सुरेश की पत्नी किरण ने आ कर पति को आवाज दी तो कोई जवाब नहीं मिला। फिर किरण बरामदे में आई और जैसे ही चारपाई पर खून से लथपथ पति सुरेश का शव देखा तो वह रोने-चिल्लाने लगी। तब घर के अन्य सदस्य दौड़ कर आए। उन्होंने देखा कि सुरेश का खून से लथपथ शव बिस्तर पर पड़ा था। पड़ताल में पुलिस को पता चला कि मृतक सुरेश वैष्णव मंदिर में बने घर में रहता था। सुरेश के परिवार में 30 साल की पत्नी किरण के अलावा 4 बच्चे थे। घटना वाली रात किरण कमरे में अपने बच्चों के साथ सो रही थी। सुरेश बाहर बरामदे में ही सोता था। एसपी श्वेता धनखड़ ने मृतक की पत्नी किरण से पूछा, ‘आप ने रात में क्या कोई चीख सुनी थी?’ किरण बोली, ‘नहीं, मैंने कुछ भी नहीं सुना।’ मृतक के अन्य परिजनों से भी पूछताछ की गई। मगर सभी ने यही बात दोहराते हुए कहा कि उन्होंने भी कोई आवाज या खटका वगैरह नहीं सुना था। तब एसपी श्वेता धनखड़ ने पूछा, ‘किसी से कोई दुश्मनी थी क्या सुरेश की? किसी से कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ हो या किसी पर शक हो तो बताएं।’ मृतक के परिजनों ने कहा कि मृतक सुरेश बेहद शांत स्वभाव का था। उस की किसी से दुश्मनी नहीं थी। न ही किसी से उसकी लड़ाई हुई थी। मृतक के परिजनों का कहना था कि उन्हें किसी पर शक भी नहीं हो रहा है। कोई कातिल घर में आ कर सोते व्यक्ति को धारदार हथियार से मार कर चला गया और मृतक के बीवी-बच्चे और भाई तथा अन्य सदस्यों को भनक तक नहीं लगी। घर की दीवार इतनी ऊंची थी कि उस पर चढ़ कर अंदर आना संभव नहीं था। न ही घर के चारों ओर की दीवारों के पास में किसी के पैरों के निशान थे। अगर कोई दीवार पर चढ़ता तो उस के मार्क जरूर होते। मगर वहां पर तो किसी के पैरों के निशान नहीं थे। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को मृतक के परिवार के लोगों पर शक हुआ कि हो न हो इस हत्याकांड में परिवार का कोई व्यक्ति शामिल है। पुलिस टीम ने शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया। FSL टीम ने एविडेंस कलेक्ट किए। शव पर धारदार हथियार के 3-4 गहरे जख्म थे। हालांकि, अभी पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक का इंतजार करना था। पुलिस टीम ने मृतक के परिजनों सहित ग्रामीणों से भी पूछताछ की लेकिन कुछ भी ऐसा नहीं था जिससे इन्वेस्टिगेशन में राह मिले। घूम फिरकर पुलिस के शक की सुई मृतक सुरेश के परिजनों पर ही जा रही थी। इस का कारण था कि सुरेश का मकान सुनसान इलाके में था, जहां शोर शराबा नहीं था। ऐसे में कोई आ कर हत्या कर दे और पता नहीं चले, यह असंभव था। पुलिस एक-एक कर सुरेश की पत्नी किरण सहित सभी परिजनों की कुंडली खंगालने में लग गई। सभी के कॉल डिटेल्स निकाले गए और इनका डीप एनालिसिस स्टार्ट कर दिया गया। साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी एक्टिव कर दिया। इधर सुरेश के शव पोस्टमाॅर्टम के बाद उस के परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने उस का अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि अभी तक पुलिस के हाथ खाली थे। कल पार्ट-2 में पढ़िए सभी सवालों के जवाब


