पत्ता गोभी का जहरीला पत्ता खाने से बच्ची की मौत:बच्ची के ताऊ कर रहे थे फसल पर कीटनाशी का छिड़काव

पत्ता गोभी का जहरीला पत्ता खा लेने से शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर गांव एक वाई ढाणी में बच्ची की मौत हो गई। बच्ची ने आठ दिन पहले अपने खेत में लगी पत्ता गोभी का पत्ता खा लिया था। इस पत्ते पर बच्ची के ताऊ ने कुछ देर पहले ही कीटनाशी का छिड़काव किया था। इस कीटनाशी के असर से पत्ता खाने के करीब छह दिन बाद बच्ची कीअस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची का परिवार गांव में ही खेती किसानी करता है। खेत में पत्ता गोभी, पालक और अन्य सब्जियां उगा रखी हैं। इन्हीं की बिक्री से परिवार का खर्च चलता है। स्कूल जाने से पहले पहुंची खेत में
बच्ची स्नेहा (14) गांव साधुवाली के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में आठवीं की छात्रा थी। 18 दिसंबर को वह सुबह स्कूल जाने के लिए तैयारी कर रही थी। स्कूल का समय सुबह दस बजे था। इससे पहले सुबह करीब साढ़े सात बजे बच्ची अपने घर के सामने की तरफ बने खेत में पहुंच गई। बच्ची ने कुछ देर खेत में घूमने के बाद खेत में लगी पत्ता गोभी का पत्ता तोड़ा और खा लिया। पत्ता खाने के कुछ देर बाद ही बच्ची ने जी घबराने की शिकायत की। इस परिजनों ने उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि कुछ देर पहले वह खेत में गई और उसने वहां लगा पत्ता गोभी का पत्ता खाया था।

बच्ची के ताऊ मांगीलाल ने कुछ देर पहले ही खेत में लगी पत्ता गोभी पर कीटनाशी का स्प्रे किया था। इससे उसे बच्ची के जहरीला पत्ता खा लेने का अनुमान हो गया। वे उसे लेकर श्रीगंगागनर के हनुमानगढ़ रोड पर एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे जहां 24 दिसंबर की शाम को बच्ची ने दम तोड़ दिया। बच्ची के पिता अश्विनी कुमार ने इस संबंध में 25 दिसंबर को मर्ग दर्ज करवाई तो घटना का खुलासा हुआ। ताऊ बोले इतना ही साथ था
मृतका स्नेहा के ताऊ मांगीलाल से जब घटना की जानकारी चाही तो उन्होंने नम आंखों से इतना ही कहा कि बस इतना ही साथ था। गांव तीन वाई के सरपंच प्रमोद भादू ने बताया कि मृतका स्नेहा का परिवार शुरू से ही खेती किसानी करता रहा है। फसलों में स्प्रे करना सामान्य बात है। घटना के दिन भी ऐसा हुआ लेकिन उस दिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ग्रामीणों ने बताया कि स्नेहा का एक भाई नितेश है। ताऊ मांगीलाल के भी एक बेटा है। ऐसे में अपने ताऊ और पिता के परिवार में स्नेहा दो भाइ्यों की इकलौती बहन थी। मृतका की मां सुमन परिवार संभालती है। दादा रामस्वरूप भादू, पिता अश्वनी भादू और ताऊ मांगीलाल भादू का घटना के बाद से रो-रोकर बुरा हाल है।

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