जयपुर | बाड़ा पदमपुरा अतिशय क्षेत्र स्थित जैन धर्म के छठे तीर्थंकर भगवान पदमप्रभु की भूगर्भ से प्रकटित प्रतिमा में सोमवार को आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ (16 पिच्छिका ) एवं आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ (6 पिच्छिका) का 12 साल बाद मिलन हुआ। दोनों संतों के संघों में पंचम पट्टाचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ (32 पिच्छिका), आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ (3 पिच्छिका) भी आए। इस मौके पर पदमपुरा में चार दिगंबर जैन संघों के 57 संतों का महामिलन हुआ। सुबह आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ का चाकसू की ओर से मंगल विहार हुआ। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने बीलवा से पदमपुरा के लिए विहार किया। दोनों संघों का अहिंसा सर्किल पर मिलन हुआ। जैसे ही संत वहां पहुंचे, लोगों ने जेसीबी पर चढ़कर पुष्प बरसाए। संयोजक योगेश टोडरका के निर्देशन में बैंडबाजों पर नाचते-गाते, भक्ति में झूमते हजारों श्रद्धालु मंदिर के लिए जुलूस के रूप में रवाना हुआ। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 18 से अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन एवं मानद मंत्री हेमंत सोगानी ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के बारे में बताया कि नव निर्मित खड्गासन चौबीसी का पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं 125 फीट ऊंचा पद्म बल्लभ शिखर पर कलश व ध्वजारोहण महामहोत्सव होगा। प्रतिष्ठाचार्य पं. हंसमुख जैन के निर्देशन में कार्यक्रम होगा। पहले दिन 18 फरवरी को ध्वजारोहण से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ होगा। इस दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। 19 फरवरी को जन्म कल्याणक, 20 फरवरी को तप कल्याणक, 21 फरवरी को कैवल्य ज्ञान कल्याणक तथा 22 फरवरी को मोक्ष कल्याणक के साथ समारोह का समापन होगा।


