पन्ना में ‘घुमक्कड़ी दिल से’ समूह द्वारा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के घुमक्कड़ों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और इतिहास के संरक्षण तथा जमीनी स्तर पर प्रचार-प्रसार की रणनीति पर चर्चा की गई। सम्मेलन में बुंदेलखंड के कई जिलों से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। तालबेहट (ललितपुर) से प्रमोद बबेले ने हिमालयी यात्राओं के अनुभव साझा करते हुए बुंदेलखंड में पर्वतीय पर्यटन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। टूरिस्ट सर्किट बनाने का सुझाव टीकमगढ़ के पुराविद् रामगोपाल रैकवार ने क्षेत्र की पुरातात्विक संपदा के संरक्षण पर जोर दिया। ओरछा के पर्यटन विशेषज्ञ हेमंत गोस्वामी ने बुंदेलखंड के धार्मिक स्थलों को ‘टूरिस्ट सर्किट’ के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। मप्र साहित्य अकादमी से पुरस्कृत रविंद्र कुमार यादव और प्रभु दयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष’ सहित अन्य साहित्यकारों ने बुंदेली साहित्य की परंपरा पर चर्चा की। सागर के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर महेश तिवारी ने पर्यटन में पर्यावरण की भूमिका पर बात की, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञ इंद्रभान सिंह बुंदेला ने पन्ना के इतिहास पर प्रकाश डाला। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग पन्ना के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत बृहस्पति कुंड पर एक ग्लास ब्रिज बनाने की जानकारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के योगदान और क्षेत्र की वन संपदा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन का समापन पारंपरिक अंदाज में हुआ। सभी आगंतुकों ने पत्तल-दोना में शुद्ध बुंदेली व्यंजनों का स्वाद लिया। इसके बाद जंगल भ्रमण के दौरान एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति और साहित्य का संगम देखने को मिला। पन्ना में पदस्थ आबकारी उपनिरीक्षक और समूह के संयोजक के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में जिला आबकारी अधिकारी मुकेश कुमार मौर्य और नगर पालिका सीएमओ उमाशंकर मिश्रा का विशेष सहयोग रहा। साथ ही पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग के अन्य अधिकारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। घुमक्कड़ों के सम्मेलन की अन्य तस्वीरें…


