परिवहन नहीं होने से अटका धान का उठाव:बिरसा ब्लॉक में सिर्फ मिलर्स के भरोसे हो रहा ट्रांसपोर्ट, शासन से अनुमति का इंतजार

बालाघाट जिले में 2 दिसंबर से धान खरीदी शुरू गई है। 10 दिसंबर तक चले किसान आंदोलन और स्लॉट बुकिंग नहीं होने से कई खरीदी केन्द्रों सूने पड़े हैं। धान का परिवहन धीमी गति से हो रहा लेकिन अब धान आना शुरू हो गई है। ऐसे में जिले की करीब 130 समितियों में हो रही धान खरीदी केन्द्र से परिवहन एक बड़ी समस्या बन गई है। हालांकि, परिवहन को लेकर संबंधित विभाग ने ट्रांसपोर्ट मालिकों से अनुबंध किया है। लेकिन शासन की अनुमति सिर्फ बिरसा ब्लॉक को छोड़कर शेष ब्लॉकों में नही मिली है। इस साल 55 ऐसे केन्द्र हैं, जो गोदाम और कैप में है। इससे यहां धान सीधे जमा हो रही है। लेकिन, धान खरीदी एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम से मिली जानकारी अनुसार, तकरीबन 130 सोसायटियों में धान खरीदी हो रही है। बताया गया कि यहां से धान का परिवहन सिर्फ मिलर्स के भरोसे है। जिसकी गति भी कम है। परिवहन कि व्यवस्था में किया गया बदलाव दरअसल, पहले धान को केन्द्रों में खरीदकर उसका परिवहन गोदामों और कैपों में किया जाता था। जहां से कस्टम मिलिंग करने वाले मिलर्स को धान उठाव करना होता था। लेकिन बीते सालों से सरकार ने धान खरीदी केन्द्र से ही कस्टम मिलर्स को धान उठाव करने के निर्देश दिए हैं। इससे सरकार का परिवहन व्यय बच रहा है। चूंकि बालाघाट धान उत्पादक जिला है और यहां जिस तरह से इस साल रिकॉर्ड तोड़ एक लाख 30 से ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया है। इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में किसान केन्द्रों में धान विक्रय करेंगे। जिसके परिवहन को लेकर शासन से अब तक अनुमति नहीं मिली है। धान खरीदी केन्द्रों से धान के उठाव के लिए विभाग को भी सरकार से परिवहन अनुमति का इंतजार है। अब तक 31 हजार 234 मीट्रिक टन धान खरीदी गई धान खरीदी एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम से मिली जानकारी अनुसार, जिले में 2 दिसंबर से 16 दिसंबर तक 31 हजार 234 मीट्रिक टन धान खरीदी गई है। जिसमें अनुबंधित लगभग 106 मिलर्स ने केवल 15 हजार मीट्रिक टन ही धान का उठाव किया है। मिलर्स के धान उठाव करने की धीमी गति से धान सोसायटियों में डंप पड़ा है। बताया गया कि परिवहन को लेकर विभाग ने शासन से पत्राचार किया है। लेकिन अब तक इसका कोई जवाब नहीं आया है। नॉन से मिली जानकारी अनुसार, जिले के बैहर, बिरसा और तिरोड़ी, ऐसी तहसीलें हैं। जहां कैप और गोदाम नहीं है। जिसमें केवल बिरसा ब्लॉक से ही धान के परिवहन की अनुमति मिली है। जबकि नियम है कि 72 घंटे में धान का परिवहन हो जाना चाहिए।

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