जिले में परिवहन विभाग की हालिया सख्ती के बाद ओवरलोड डंपर चालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए एक खतरनाक रास्ता अख्तियार कर लिया है। भारी भरकम डंपर अब मुख्य स्टेट हाईवे-37 को छोड़कर ग्रामीण अंचलों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सड़कों के टूटने का डर है, बल्कि ग्रामीणों और राहगीरों की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। ग्रामीण रूट बना ‘सेफ पैसेज’ झुंझुनूं शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन चेकिंग मुख्य राजमार्गों पर होती है। इसी से बचने के लिए चालकों ने चनाना, गोलवा सोलाना, इंडाली, भडूंदा और खाजपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों को नया रूट बना लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सड़कें भारी माल वाहक वाहनों के लिए नहीं बनी हैं। क्षमता से अधिक भार लेकर गुजर रहे इन डंपरों की वजह से डामर की सड़कें जगह-जगह से धंसने लगी हैं। आधा दर्जन ट्रक जब्त ग्रामीण रास्तों से ओवरलोडिंग की गुप्त सूचना मिलने पर परिवहन विभाग ने जाल बिछाया। DTO मोनू मीना के नेतृत्व में विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी की, जिसमें आधा दर्जन से अधिक ओवरलोडिंग ट्रकों को पकड़ा गया। ज्ञात हो कि इससे पहले विभाग ने एक्स्ट्रा बॉडी लगाकर माल ढोने वाले सैकड़ों डंपरों पर भारी जुर्माना लगाया था, जिसके बाद से ही चालकों ने मुख्य रास्तों से किनारा कर लिया है। ट्रक यूनियन का विरोध एक तरफ जहां प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रक यूनियन झुंझुनूं ने अवैध खनन और रॉयल्टी नाकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन का कहना है कि जो ट्रक मालिक नियमों का पालन कर रहे हैं और अंडरलोड चलते हैं, उनकी गाड़ियां खड़ी हैं क्योंकि उन्हें काम नहीं मिल रहा।


