पर्यटन नगरी उदयपुर में विरासत संरक्षण और बच्चों के मनोरंजन के लिए प्रस्तावित देबारी टॉय ट्रेन प्रोजेक्ट पिछले आठ साल से ठंडे बस्ते में पड़ा है। वर्ष 1899 में बनी मीटर गेज की ऐतिहासिक टनल को सहेजने और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना अब फाइलों तक सीमित रह गई है। करीब 90 मीटर लंबी देबारी टनल मेवाड़ के रेल इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर रही है। वर्ष 2005 में आमान परिवर्तन (ब्रॉडगेज) के बाद यह टनल अनुपयोगी हो गई। इसके बाद रेलवे और नगर विकास प्रन्यास (यूडीए) ने संयुक्त रूप से योजना बनाई कि टनल क्षेत्र को विकसित कर यहां बच्चों के लिए टॉय ट्रेन चलाई जाए। वर्ष 2018 में रेल मंत्रालय ने करीब 5 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया (अब पंजाब के राज्यपाल) की मौजूदगी में उच्च स्तरीय बैठकें भी हुईं और प्रारंभिक तैयारियों के संकेत मिले। फिर भी काम शुरू नहीं हुआ। राज्यपाल कटारिया बोले-मैंने प्रस्ताव रखा था
“2016-18 के दौरान मैं राजस्थान का गृह मंत्री था, तब 5 करोड़ के बजट का प्रस्ताव रखा था, ताकि खाली पड़ी इस ऐतिहासिक टनल का सदुपयोग हो सके। यहां टॉय ट्रेन का संचालन कर धरोहर संरक्षण के साथ टूरिस्ट प्वाइंट बनाया जा सकता है।”
-गुलाबचंद कटारिया, राज्यपाल पंजाब एवं और चंडीगढ़ के प्रशासक रेलवे अफसर ने नकारा-पाइपलाइन में नहीं योजना
“फिलहाल इस तरह का कोई प्रोजेक्ट नहीं है और न ही कोई योजना पाइपलाइन में है।”
-महेंद्र देपाल, एरिया रेलवे ऑफिसर, उदयपुर


