पलकों पर उभर आई कोहरे की बूंदें:10 में से 7 साल बिना मावठ बीता दिसंबर, इस साल दो

दिसंबर मावठ के लिहाज से कमजोर महीना साबित हो रहा है। बीते 10 सालों में 7 साल ऐसे रहे जब दिसंबर बिना मावठ के ही बीता। हालांकि इस साल अब तक एक एमएम मावठ तो हो चुकी है और शुक्रवार को फिर से मावठ के आसार बन रहे हैं। बीते 10 वर्षों में सर्वाधिक 8.4 एमएम बारिश 2019 में हुई थी। बीकानेर में तेज बारिश और तूफान तब ही ज्यादा आते हैं जब मौसम करवट ले रहा होता है यानी फरवरी मार्च में। कई सालों से फरवरी में तूफान के साथ बारिश से फसलों को भी नुकसान हेा चुका है। 2014 से 2024 के बीच दिसंबर का आकलन करने से सामने आया कि 2021, 2019 और 2017 में ही मावठ हुई थी। बाकी साल दिसंबर सूखे बीते। दिसंबर की मावठ का किसानों को सबसे ज्यादा इंतजार रहता है। क्योंकि दिसंबर वो महीना है जब फसल बढ़वार पर होती है। अगर फसल की बढ़वार अच्छी होगी तो फूल और फल अच्छे होंगे। बढ़वार अच्छी हुई तो पैदावार भी अच्छी होगी। इस साल राहत सिर्फ इतनी है कि अब तक एक एमएम बारिश हो चुकी है। 27 दिसंबर को मौसम विभाग ने फिर से मावठ के आसार जताए हैं। जिन सालों में मावठ नहीं, उस साल पारा ज्यादा गिरा अध्ययन में सामने आया कि दिसंबर में जिन सालों में मावठ हुई उसकी तुलना में जिस साल बारिश नहीं हुई उस साल तापमान कम हुआ और सर्दी ज्यादा रही। 2023 के दिसंबर में मावठ नहीं हुई तो सबसे कम पारा 7 डिग्री रहा। 2022 में मावठ के बिना 2.4 डिग्री तक पारा पहुंचा। 2021 में 1.8 एमएम मावठ हुई तो न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा। 2020 में मावठ नहीं हुई तो पारा 3.1 डिग्री रहा। इन सालों में नहीं हुई मावठ पर पारा कम दिसंबर में दो फॉग डे, दोनों हो चुके : मौसम विभाग के मानकों के मुताबिक इस साल का दिसंबर सारी उम्मीदें पूरी कर रहा है। मानकों के मुताबिक दिसंबर में 2 फॉग डे होना चाहिए और बीकानेर में इस साल 3 बार कोहरा छा चुका है। बारिश के लिहाज से दिसंबर में 2.9 एमएम बारिश होनी चाहिए और एक एमएम बारिश हो चुकी है। यानी 1.9 एमएम बारिश औसत से कम है। अगर शुक्रवार को मावठ हो गई तो ये औसत भी पूरा हो जाएगा। तापमान भी अब 4.7 डिग्री के सबसे निचले पायदान तक गया है। हालांकि अब बादल छाने के कारण पारा वापस 5 डिग्री के नीचे जाने में समय लगेगा। दिन में बादलों से दबी धूप : गुरुवार को मौसम का मिलाजुला असर रहा। सुबह हल्की धुंध सी रही। हल्का कोहरा छाया। सुबह के मिजाज को देखकर लगा कि दिन में धूप निकलेगी लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे बादल छाते गए। दोपहर में भी लोग धूप के लिए आसमान की ओर निहारते रहे पर धूप के आसार दूर तक नजर नहीं आए। जब 3 बजे तक भी धूप नहीं खिली तो लोग सर्दी से बचाव में वापस घरों में दुबक गए। वरना धूप निकलने पर चबूतरों से लेकर छतों पर रौनक रहती थी। गुरुवार को लोग ज्यादातर घरों में दुबके रहे। बादलों के कारण ही न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग की मानें तो न्यूनतम तापमान में एक बार और इजाफा होने के बाद वापस गिरावट होगी।

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