राज्य के सरकारी अस्पतालों में सब-स्टैंडर्ड क्वालिटी की दवाइयों की सप्लाई हो रही हैं। इसका खुलासा पलामू में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाओं की जांच कराने पर हुआ है। जिला भंडार और एक पीएचसी से 62 दवाओं के रैंडम सैंपल लिए गए थे। सैंपलों को जांच के लिए कोलकाता के सेंट्रल ड्रग लेबोरेट्री में भेजा गया था। सिर्फ 20 सैंपल की जांच रिपोर्ट में 18 दवाइयां सब-स्टैंडर्ड क्वालिटी की मिलीं। 42 सैंपलों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसी सब-स्टैंडर्ड दवाइयां लेने से बीमारी ठीक नहीं होती, लेकिन दूसरी बीमारी या अन्य साइड इफेक्ट जरूर होने लगते हैं। इधर, 20 दवाइयों की रिपोर्ट आने के बाद दवा सप्लाई करने वाली एजेंसी से अस्पतालों में इन दवाइयों की सप्लाई रोक दी गई है। ये दवाइयां गुजरात की फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित है। जिसे जमशेदपुर के सप्लायर द्वारा पलामू में सप्लाई किया गया था। कैल्शियम की दवा में कैल्शियम व विटामिन में विटामिन की मात्रा 5% भी नहीं मिलीसभी दवाइयों के सैंपल फरवरी में ही जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट आने के बाद इन दवाइयों के वितरण को रोकने के लिए सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया है। सिविल सर्जन अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इन दवाइयो का वितरण किसी अस्पताल से मरीजों के बीच नहीं किया गया है। औषधि निरीक्षक कैलाश मुंडा ने बताया कि जिला भंडार गृह से 47 और तरहसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 15 दवाइयों का सैंपल जांच के लिए कोलकाता में स्थित केन्द्रीय प्रयोगशाला भेजा गया था। जहां से 62 में से 20 दवाइयों की रिपोर्ट मिल गई है। इनमें 18 दवाइयां घटिया क्वालिटी की हैं। ये सभी दवाइयां कैल्शियम कार्बोनेट और विटामिन डी थ्री कंपोजिशन बताकर सप्लाई की गई थीं। लेकिन, इनमें कैल्शियम व विटामिन की मात्रा 5% भी नहीं मिली। फरवरी में ही जांच के लिए भेजे गए थे सैंपलसभी दवाइयों के सैंपल फरवरी में ही जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट आने के बाद इन दवाइयों के वितरण को रोकने के लिए सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया है। सिविल सर्जन अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इन दवाइयो का वितरण किसी अस्पताल से मरीजों के बीच नहीं किया गया है।


