शहर की सड़कों पर हाथठेला लगाकर यातायात को अवरुद्ध करने वालों से आम लोग तो परेशान हैं हीं, जिनकी दुकानों के सामने ये हाथठेले लगते हैं, वे भी अब खुलकर सामने आ गए हैं। गुरुवार को पहली बार उनका ऐसा विरोध देखने को मिला जब हाथठेला वालों के विरोध में शहर की 1500 दुकानें बंद रहीं। कटरा मस्जिद से लेकर राधा तिराहा तक की दोनों ओर की दुकानों सहित पूरा निगम मार्केट, बख्शी खाना, टपरा मार्केट आदि क्षेत्र की दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। व्यापारियों ने दुकानें दोपहर 2 बजे तक के लिए बंद करने का आह्वान किया था, परंतु जब हाथठेले लगे रहे और प्रशासन की सुस्त कार्रवाई सामने आई तो व्यापारियों ने दुकानें शाम तक बंद रखीं। कई दुकानदारों ने निगम मार्केट के सामने चक्काजाम कर दिया। उनका कहना था कि यह रोज की समस्या हो गई है। सफेद लाइन डालकर ठेले लगाने की व्यवस्था बंद की जाए। हमारी दुकानों के सामने बेतरतीब ढंग से ठेले खड़े किए जाते हैं। जिससे हमारी ग्राहकी प्रभावित होती है। हाथठेले वालों से व्यवस्था बनाने की बात कहो तो वे लड़ते और गालियां देते हैं। ऐसे में उन्हें कहीं दूसरी जगह विस्थापित किया जाए। निगम का दावा, अब सख्त कार्रवाई होगी, एक ठेला जब्त किया व्यापारी संघ द्वारा नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री को ज्ञापन देने के बाद निगम द्वारा कटरा मस्जिद से राधा टॉकीज तिराहा तक यातायात व्यवस्था में बाधक बन रहे हाथ ठेला दुकानदारों को हटाया गया। साथ ही सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। निगमायुक्त ने अतिक्रमण प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि यातायात व्यवस्था में बाधक बन रहे हाथठेला मुख्य मार्गों पर खड़े होने पर हटाने की कार्रवाई करें। निगम द्वारा सड़क के दोनों ओर सफेद लाइन खींचकर उसके अंदर हाथठेला दुकानदारों को व्यापार करने की जो व्यवस्था बनाई गई थी, उसका पालन उन्होंने नहीं किया, इसलिए वह निरस्त की जाती है। हाथ ठेला पर विक्रय करने वाले दुकानदार यदि मुख्य मार्गों पर खड़े मिलें तो कार्रवाई करें। अमले ने एक हाथठेला भी जब्त किया। हाथठेला वाले बोले- जहां जगह दिखे लगा लो, अमला आए तो गलियों में चले जाओ शहर में हाथठेला वालों की बढ़ती संख्या और मनमानी से सड़क पर खड़े करने की वजह जानने भास्कर रिपोर्टर ने हाथठेला व्यापारियों से संपर्क किया। उन्होंने कहा दो तरह की व्यवस्था है। फुटपाथ के नीचे जहां जगह हो, वहां अपना ठेला लगाकर खड़े हो जाओ कोई कार्रवाई नहीं होती। कुछ लोग सड़क के अलग-अलग हिस्सों पर कब्जा कर सालों से दुकान लगा रहे हैं। अपने कब्जे की जगह के आसपास वह कुछ पैसे लेकर दूसरे दुकानदारों को वहां हाथठेला खड़ा करने की अनुमति दे देते हैं। अगर निगम की गाड़ी आती दिखती है तो सामान इकट्ठा कर ठेले को चलाने लगते हैं। दुकानदार ने बताया कि सड़क पर एक जगह खड़े होकर विक्रय करते पकड़े जाने पर चालानी कार्रवाई होती है, वह भी कभी-कभार। इसलिए निगम या ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी देखते ही हम लोग वहां से निकल जाते हैं। 10-15 मीटर में ही किसी गली में जाने पर पुलिस और निगम का अमला सीधे निकल जाता है। पकड़े जाने पर सामान और ठेला जब्त तो होता है लेकिन बाद में समझाइश और चालान के बाद सब छोड़ दिया जाता है।


