पहले रोजे पर बच्चों में उत्साह, बारिश अली, तासीन परवीन व अनम फातिमा ने रखा रोजा

गढ़वा| पाक महीना रमजान उल मुबारक के पहले जुमा का नमाज शुक्रवार को अदा की जाएगी। इसे लेकर जिले भर की मस्जिदों में विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रमजान के पहले जुमा की नमाज को लेकर मुस्लिम समुदाय में खास उत्साह देखा जा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी मस्जिद इंतजामिया कमेटियों ने नमाजियों की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था की है। मस्जिदों में वजू के लिए स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। साथ ही नमाज स्थल की विशेष साफ-सफाई कराई गई है। ताकि इबादत के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। नमाजियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मस्जिद परिसरों और आसपास के क्षेत्रों की भी सफाई कराई गई है। ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर) की जांच कर उसे दुरुस्त किया गया है। ताकि खुतबा और नमाज की तकरीर सभी तक स्पष्ट रूप से पहुंच सके। गढ़वा | पाक महीना रमजान उल मुबारक के आगमन के साथ ही जिले में अकीदत और इबादत का माहौल बन गया है। रमजान के पहले रोजे पर जहां बड़े-बुजुर्गों ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ रोजा रखा। वहीं छोटे बच्चे भी पीछे नहीं रहे। गढ़वा शहर के नगवां मोहल्ला निवासी मो. इकराम के पुत्र बारिश अली, मझिआंव नगर पंचायत निवासी तौकीर खान की पुत्री तासीन परवीन तथा इराकी मोहल्ला निवासी कमरूद्दीन की पुत्री अनम फातिमा ने रमजान का पहला रोजा रखकर सभी का दिल जीत लिया। कम उम्र में रोजा रखने की उनकी लगन और उत्साह ने परिवार व मोहल्ले के लोगों को काफी प्रभावित किया। तीनों बच्चों ने पूरे दिन सब्र और संयम के साथ रोजा रखा तथा शाम को मगरीब अजान के बाद इफ्तार कर रोजा खोला। इस दौरान उन्होंने खुदा की इबादत की और अपने परिवार, समाज एवं देश की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। परिजनों ने बताया कि बच्चों में रमजान को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। वे सहरी के समय समय पर उठे और पूरे नियम के साथ रोजा रखा। परिवार के सदस्यों ने उन्हें हौसला अफजाई करते हुए दीन की बातें समझाईं और रोजे की अहमियत बताई। मोहल्ले के लोगों ने भी बच्चों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर लोगों ने कहा कि रमजान का महीना सब्र, त्याग, इबादत और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इस पवित्र माह में रोजा रखने के साथ-साथ नमाज, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष जोर दिया जाता है। छोटे बच्चों द्वारा रोजा रखना इस बात का प्रतीक है कि नई पीढ़ी भी धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति जागरूक हो रही है।

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