कामदेव साहू/ हेमंत वैष्णव| महासमुंद/ बसना बदलती जलवायु और गिरते भूजल स्तर के बीच बसना जनपद पंचायत ने भविष्य की प्यास बुझाने के लिए एक मास्टर प्लान बनाया है। इसके तहत इलाके की पहाड़ियों और ढलानों को वॉटर बैंक में बदला जा रहा है। इसके लिए यहां 35 हजार स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच यानी छोटे गड्ढों का जाल बिछाने की तैयारी है। वर्तमान में बसना ब्लॉक के पहाड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत उड़ेला, चंदखुरी और बारडोली की पथरीली ढलानों पर कंटूर ट्रेंच बनाए जा रहे हैं। इन गड्ढों की लंबाई करीब 2 मीटर है। वही चौड़ाई डेढ़ मीटर, जबकि गहराई करीब डेढ़ फीट तक है। ढलान वाली जगहों पर बनाए जा रहे इन गड्ढों में बरसाती पानी सीधे न बहकर रुकेगा और सीधे जमीन के अंदर चला जाएगा। ये ऐसे गांव है, जहां सामान्य दिनों में पानी का वाटर लेवल करीब 150 फीट तक रहता है, जबकि गर्मी शुरु होते ही वाटर लेवल गिरने लगता है। करीब 400-450 फीट तक नीचे चला जाता है। ऐसे में यहां के ट्यूबवेल और हैंडपंप भी जवाब दे जाते है। एकाध ट्यूबवेल ही चल पाते है। उसमें भी धार इतनी पतली कि घंटों इंतजार करना पड़ता है। कंटूर ट्रंच बनाए जाने से इन इलाकों का जल स्तर 8 फीट तक ऊपर आने की उम्मीद है। वाटर रिचार्ज बढ़ेगा, इससे गर्मियों में राहत: आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में बारिश का पानी तेज रफ्तार से बहकर नदी-नालों में चला जाता है, जिससे जमीन सूखी रह जाती है। भूजल विशेषज्ञों और विभागीय अफसरों की माने तो यदि एससीटी का निर्माण सही घनत्व में हो, तो इसके परिणाम दूरगामी होते हैं। एक सीजन की बारिश के बाद ही आसपास के हैंडपंप और कुओं के जल स्तर में 5 से 8 फीट तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। जिन बोरवेल्स में मार्च-अप्रैल में पानी खत्म हो जाता था, वे इस तकनीक की मदद से जून तक सक्रिय रह सकेंगे। महज 35 हजार में काम पूरा हो जाएगा खास बात ये है कि यह केवल खेतों और पहाड़ियों तक ही नहीं है, बल्कि सामुदायिक भवनों के पास भी जल संचयन की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए मात्र 35 हजार रुपए की निर्धारित राशि से सोखता गड्ढा बनाकर गांव के गंदे पानी या वर्षा जल को जमीन के अंदर भेजने की योजना है।


