पांच दिन में जुड़वा नवजात बच्चों की हुई मौत:घर जाने नहीं मिली एंबुलेंस; जिला अस्पताल के बाहर शव लेकर बिलखती रही मां

शिवपुरी के जिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद लाए गए जुड़वा नवजात बच्चों की पांच दिन के भीतर मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इसके बावजूद आदिवासी प्रसूता को उसके गांव पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। कई घंटों प्रसूता अपने मृत बच्चे को लेकर परिजन के साथ जिला अस्पताल परिसर में बिलखती रही। बाद में परिजन और प्रसूता और उसके मृत बच्चे के शव को किराए के वाहन में सवार होकर घर ले गए। तीन दिन के भीतर जुड़वा बच्चों की हुई मौत जानकारी के मुताबिक, खोड़ चौकी क्षेत्र के नयागांव की रहने वाली अंजू आदिवासी पत्नी सुनील आदिवासी को प्रसव पीड़ा के बाद 16 दिसंबर को खोड़ के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। अंजू ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। पांच दिन पहले जच्चा और उसके दो जुड़वा नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन 17 दिसंबर को जुड़वा बच्चे में से एक नवजात की मौत उपचार के दौरान जिला अस्पताल में हो गई थी। इसके बाद दूसरे बच्चे का उपचार एसएनसीयू में चल रहा था। शनिवार को दूसरे बच्चे की भी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को सही से दूध नहीं पिलाया गया। बच्चे की देख-रेख में नर्सिंग स्टाफ ने लापरवाही बरती। जबकि दोनों बच्चे गर्भ में 9 माह पूरा करने के बाद जन्मे थे। एम्बुलेंस के इन्तजार में घंटों मृत बच्चे को लेकर बिलखती रही मां बता दें कि पहले बच्चे की मौत के बाद उसका पिता सुनील आदिवासी अपने मृत बच्चे को दफनाने अपने गांव गया हुआ था। वहीं शनिवार को दूसरे बच्चे की मौत के बाद शव को परिजन के सुपुर्द करते हुए प्रसूता को छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन उन्हें गांव पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मां अपने मृत बच्चे को लेकर करीब दो घंटे जिला अस्पताल परिसर में बिलखती रही। बाद में परिजन किराए का वाहन करके ले जाना पड़ा। एक्स्ट्रीमली लो वेट बर्थ के थे दोनों नवजात इस मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ बीएल यादव का कहना है कि बच्चों की डिलीवरी अन्य स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। जिन्हें रेफर कर जिला अस्पताल भेजा गया था। एक बच्चे का वजन 1 किलो 400 ग्राम था और दूसरे बच्चे का वजन 1 किलो 200 ग्राम था। ये वजन सामान्य नवजात के बच्चों से बहुत कम था, इतने वजन के बच्चों को एक्स्ट्रीमली लो वेट बर्थ की श्रेणी में रखा जाता है। उन्हें बचाने का डॉक्टरों द्वारा भरपूर प्रयास किया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था। सिविल सर्जन डॉ बी एल यादव ने बताया कि एम्बुलेंस भेजने के पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है। सूचना के अभाव में उन्हें एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। अगर उनके द्वारा प्रबंधन से एम्बुलेंस को कहा जाता तो उन्हें एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जाती।

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