भास्कर न्यूज | जालंधर बस्ती गुजां का श्री पंचवटी मंदिर 200 वर्षों की आध्यात्मिक विरासत को संजोए हुए है। मंदिर के चल रहे पुर्ननिर्माण कार्य के दौरान मंदिर प्रधान लक्की मल्होत्रा और महासचिव बाल कृष्ण मैनी ने बताया कि आखिर कैसे इस मंदिर का नाम ‘पंचवटी’ पड़ा। उन्होंने बताया- यहां मुख्य रूप से पांच पावन विग्रह- शिव परिवार, भैरव बाबा, हनुमान जी, शीतला माता और राधा-कृष्ण विराजमान हैं। यहां ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ अत्यंत दुर्लभ नर्मदेश्वर शिवलिंग के भी भक्त दर्शन करने आते हैं। बहरहाल, इस प्राचीन विरासत को राजस्थान के कारीगर नया रूप दे रहे हैं। मंदिर के आसमान छूते पांच गुंबद (जिनमें चार गुंबद 40 फुट और मुख्य शिवालय 50 फुट का होगा) आने वाले समय में दूर से ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। इसपर 21 कलश लगेंगे। मंदिर की सबसे सुंदर तस्वीर इसकी पाठशाला में दिखती है। शिक्षक गुरु अंगद प्रभु जी ने बताया कि एक साल पहले महज 10-15 बच्चों से शुरू हुई यह मुहीम आज एक वटवृक्ष बन चुकी है। यह सिर्फ शिक्षा नहीं, संस्कारों की वापसी है। यहां 3 साल के नन्हे बच्चों से लेकर 65 साल के बुजुर्ग एक साथ गीता और भागवत के श्लोक पढ़ते हैं। हर रविवार सुबह जब मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन और गौ सेवा के संकल्प से गूंजता है। यहां केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एकादशी व्रत, तुलसी सेवा और भक्त चरित्र की कथाओं के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है।


