झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पर्वत को लेकर आदिवासी समाज और जैन समुदाय के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। संथाल आदिवासी इस पर्वत को मारंगबुरू के नाम से पूजते हैं। सोनोत संथाल समाज केंद्रीय समिति ने धनबाद समाहरणालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया। समिति ने डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति को मांगों का ज्ञापन सौंपा। समिति के केंद्रीय संयोजक रमेश टुड्डू ने बताया कि 12 मार्च को देशभर के आदिवासी मधुबन में एकजुट होकर प्रतिरोध मार्च निकालेंगे। टुड्डू ने कहा कि मारंगबुरू संथाल आदिवासियों का सर्वश्रेष्ठ देव स्थल है। यह स्थल इको सेंसिटिव जोन घोषित है। इसके बावजूद वहां कई धर्मशालाएं और मठ बनाकर स्थल का अतिक्रमण किया जा रहा है। आदिवासी, मूलवासी और दलित समाज के विभिन्न संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग की है कि उनकी जायज मांगों पर उचित कार्रवाई की जाए। सोनोत संथाल समाज की प्रमुख मांग है कि मारंगबुरू स्थल को अतिक्रमण मुक्त किया जाए।


